Sunday, January 8, 2012

पर्यटन की पुस्तक का पहला अध्याय छत्तीसगढ़ के साल वनों पर


छत्तीसगढ़ में इंडियन एक्सप्रेस के न्यूज़ ब्यूरो की जिम्मेदारी सँभालने के बाद पहला निर्देश अपने प्रभारी योगेश वाजपेयी से यह मिला कि दो महीने छत्तीसगढ़ में सिर्फ घूमना है जिसका सारा खर्च दफ्तर उठाएगा इससे पहले एक्सप्रेस के समूह संपादक शेखर गुप्ता ने छत्तीसगढ़ को आने वाले समय के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य बताते हुए मुझे वहा भेजा था .खैर मुख्यमंत्री अजित जोगी से उस समय मेरे ही नहीं दिल्ली के अन्य अखबारों के साथी पत्रकारों लव कुमार ,आरती धर ,प्रदीप मैत्र और होता से करीबी संबंध थे लिहाजा इस आदिवासी अंचल को हम सबने घूम घूम कर देखा .फिर जनसत्ता लांच हुआ और पहले अंक में ही प्रभाष जोशी का सम्पादकीय और मेरा पर्यटन पर जो लेख गया वह छत्तीसगढ़ के पर्यटन विभाग की कई नीतियों का आधार भी बना और बाद में जनसंपर्क विभाग ने उसे विज्ञापन की तरह इस्तेमाल किया .पर जब सत्ता से टकराव शुरू हुआ तो अख़बार में ज्यादा समय देना पड़ा सिर्फ रविवार को रायपुर से २९ मील पर नदी किनारे स्थित सिंचाई विभाग का डाक बंगला जो तत्कालीन जनसंपर्क निदेशक चितरंजन खेतान से करीबी संबंधो के चलते हमें मिल जाया वह अड्डा बना दिन भर रहने का और खुद लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाकर खाने का .यह सब फिर से याद कर रहां हूँ क्योकि अब दूसरी पुस्तक राजनीति की बजाय पर्यटन पर होगी और शुरुआत छत्तीसगढ़ से होनी है .बस्तर से लेकर तौरंगा के डाक बंगले की शाम आज भी याद है .इस मामले में जनसत्ता के अपने सहयोगी अनिल पुसदकर , राजकुमार सोनी जो अब तहलका से जुड़ गए है ,संजीत त्रिपाठी ,भारती आदि से भी मदद लेनी है .पहली पुस्तक लिखने के लिए प्रभाष जोशी ने प्रेरित ही नही किया बल्कि उसका विमोचन समारोह भी खुद वीपी सिंह के घर पर करवाया और कांशीराम से विमोचन कराया .अब यह जिम्मेदारी अपने मित्रों की होगी इसकी भूमिका अलोक तोमर को लिखनी थी जो जा चुके है .इस सिलसिले में छत्तीसगढ़ के साथी कुछ पुराने संस्मरण याद दिला सके भेज सके तो मदद मिलेगी .
अंबरीश कुमार

द्वीपों का गुलदस्ता है लक्षद्वीप


अंबरीश कुमार
सुनहरे सम्रुन्द्री तट, नारियल के घने जंगल, जादुई लैगूनों, बहुत कम आबादी, पर्यटकों से प्राय अछूता। टूना मछली के लिए दुनिया में मशहूर ये द्वीप समूह पर्यटकों की आवाजही पर काफी नियंत्रण होने की वजह से दूसरी सैरगाहों से काफी अलग है। कोच्चि से कोई चार सौ किलोमीटर दूर बसे लक्षद्वीप के द्वीप भले ही छोटे हों, यहां के लगून काफी बड़े हैं। लैंगूनों की दुनिया भी अनोखी है। देश में लक्षद्वीप ही ऐसी जगह है जहां पर्यटक धरती की सुंदरता देखने के साथ-साथ लगून की रंगीन दुनिया में भी जा सकते हैं। आपको तैरना भले ही न आए, सम्रु के भीतर की अनोखी दुनिया को देख सकते हैं। अगर तैरना आता हो तो स्कुबा डाइग के जरिए सागर की तलहटी में हजरों किस्म की मछलियों, सजी मूंगे (कोरल) की चित्र-चित्र बस्तियों कछुओं, आक्टोपस और दूसरे सम्रुन्दी जीवों के साथ कुछ समय बिताया जा सकता है। लक्षद्वीप के लैंगून सजे एक्वेरियम की तरह है।

लक्षद्वीप में अगर पानी जमकर बरसता है, तो सूरज की किरण भी भरपूर चमकती हैं। यहां के हर द्वीप से सूर्यादय और सूर्यास्त का रंगीन नजारा देखा जा सकता है। सूर्यास्त के समय लगून पर डूबते सूरज की किरणों के अनोखे रंग अद्भुत पैदा करते हैं। सूरज के सामने अगर कोई छोटी ना आ जाए तो यह दृश्य जैसे मन पर छप जाता है। सोलहवीं शताब्दी में यहां का प्रशासन केन्नानूर के मुसलिम प्रशासकों के हाथ में आ गया था, लेकिन उसकी निरंकुशता से तब आकर यहां के निवासियों ने मैसूर के टीपू सुल्तान से मदद की गुजरिश और उसने पांच द्वीपों पर कब्जा कर लिया। अब टीपू सुल्तान के नाम का एक भव्य समुन्द्री जहाज पर्यटकों को लक्षद्वीप ले जता है। सागर यात्रा के दौरान ज्यादातर पर्यटक अपने वातानुकूलित केबिनों से बाहर निकल कर डेक पर ही जमे रहते हैं। दोपहर में चलने वाला जहाज अगले दिन सुबह लक्षद्वीप पहुंच जता है। जहाज का अनुशासन भी सेना जैसा है। सुबह होते ही जहाज के जनसंपर्क अधिकारी यात्रियों को बताते हैं कि कावरती (लक्षद्वीप की राजधानी) आ गया है और सामान बांध लें। ज्यादातर पर्यटक सामान बांधने की बजाए लक्षद्वीप को पहली नजर से देखने के लिए डेक पर पहुंच ज़ाते हैं।

अरब सागर में गोल आकार का यह खूबसूरत हरा गुलदस्ता दूर से साफ नजर आने लगता है। सूर्यादय के समय हरे-नीले पानी में सुनहरी रेत और उस पर नारियल के झुण्ड। लगून की सीमा पर टीपू सुल्तान रुकता है और लोग छोटी नावों में इंतजार में खड़े हो जाते हैं। लगून की गहराई कम होने की जह से बड़े जहाज सीमा पर ही रुकते हैं, जहां से मोटर बोट के जरिए जेटी तक जाना होता है। मोटर बोट से जेटी तक पहुंचने में करीब एक घंटा लगता है। जहाज से उतर कर मोटर बोट में बैठना भी एक भिन्न अनुभव है, क्योंकि गहरे समुन्द्र की तेज लहरों में मोटर बोट तीन-चार फूट ऊपर-नीचे होती रहती है। मोटर बोट पर बैठे मछुआरे हाथ पकड़ कर लोगों को उतारते है। टीपू सुल्तान में सम्रुद की लहरों के हिचकोले पालने में सोए रहने का सा अहसास जगाती हैं, लेकिन 20-25 लोगों को ले जने वाली मोटर बोट से गहरे सम्रुन्द्र की यात्रा में कइयों को डर लग सकता है। लगून लक्षद्वीप का जादू है। हर द्वीप के एक तरह जहां सम्रुन्द्र की तेज लहरें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ द्वीप की आड़ में होने की जह से लहरें काफी हल्की भी हो जाती हैं। जिस तरफ लहरें हल्की होती हैं और द्वीप का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबा होता है, यह लगून कहलाता है। समूचा लक्षद्वीप जहां ३२ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बसा है, वहीं इसके द्वीपों के लैगूनों का क्षेत्रफल 4200 किलोमीटर से ज्यादा है। कुल ३६ द्वीपों में सिर्फ दस लोग रहते हैं और पर्यटकों के लिए सिर्फ पांच द्वीप खोले गए हैं, जिसमें एक द्वीप बंगरम विदेशी पर्यटकों के लिए भी उपलब्ध है। लक्षद्वीप के तीन दीपों की उत्पत्ति के बारे में अलग-अलग विचार हैं, पर मान्यता चाल्र्स डारविन की व्याख्या को ज्यादा मिली हुई है। उन्होंने १८४२ में कहा था कि ज्वालामुखी वाले द्वीपों के धसकने के बाद उन पर कोरल (मूंगे) इकट्ठा होने से इन द्वीपों का जन्म हुआ जिन जगहों पर ये द्वीप डूबे, यहां पहले एटाल बना और कोरल के चलते लगून बने और उन पर कोरल के चूरे के जमा होने से द्वीपों का जन्म हुआ। मूंगे सीलेट्रेटा प्रजति के रीढ़धारी जीव हैं जो बहुत सूक्ष्म प्राणी, पोलिप के साथ समुन्द्र में रहते हैं। यही पोलिप इन द्वीपों के वास्तुकार माने जते हैं। करोड़ों पोलिप मिलकर एक कोरल बस्ती की रचना करते हैं। पोलिप ही सम्रुन्द्री पानी के जरिए कैल्शियम कंकालों की रचना करते हैं। जब कोरल का जीन समाप्त हो जता है तो ये कंकाल (कोरल द्वीप) सम्रुन्द्री थपेड़ों से टूटते जाते हैं और बालू जेसे चूरे में भी तब्दील हो जाते हैं। कोरल की भी कई किस्में होती हैं।

लक्षद्वीप में पीने के पानी के स्रोत बिलकुल नहीं हैं। वर्षा के पानी को ही इकट्ठा करके इस्तेमाल किया जाता है। कुछ द्वीपों में कुएं बनाए गए हैं, जिसमें वर्षा का पानी जमा किया जाता है और फिर इस्तेमाल किया जता है। नारियल, केला, पपीता और कुछ जंगली पेड़ पौधों के अलावा लक्षद्वीप में ज्यादा कुछ नहीं पैदा होता। मिट्टी न होने की वजह से कई सब्जियां नहीं उगाई जा पाती हैं। खाद्य सामग्री, सब्जियां और जरूरत की दूसरी चीजें खाद्य सामग्री, सब्जियां और जरूरत की दूसरी चीजें कोच्चि से ही मंगाई जाती हैं।

जनसत्ता
फोटो -सविता वर्मा

Friday, January 6, 2012

वाम दलों को मिला उलेमा काउंसिल का साथ


अंबरीश कुमार
लखनऊ , जनवरी । उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा चुनाव में वाम ताकतों को इस बार पुनर्जीवन की उम्मीद नजर आ रही है। वाम लोकतांत्रिक ताकतें दो खेमों में अलग अलग भले लड रही हो पर ज्यादातर सीटों पर टकराव टालने का प्रयास भी किया जा रहा है।चुनाव के लिए पहले दौर में भाकपा ,माकपा ,फॉरवर्ड ब्लाक और आरएसपी ने मोर्चा बनाया पर इसमे धुर वामपंथी ताकतों से बात नही बनी ।दूसरी तरफ जन संघर्ष मोर्चा से जुड़े दलों और उलेमा काउंसिल के साथ भाकपा माले ने भी अपनी तीसरी सूची जारी कर दी । विधान सभा चुनाव में भाकपा ५५ सीट ,माकपा १७ सीट ,फॉरवर्ड ब्लाक १७ सीट और आठ सीट पर चुनाव लड रही है । दूसरी तरफ जन संघर्ष मोर्चा से जुड़े दलों ने उलेमा काउंसिल के साथ तालमेल कर चुनाव लड़ने का फैसला किया है । इस गठबंधन में क्रांतिकारी समता पार्टी ,नव भारत निर्माण पार्टी ,राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी ,सोशलिस्ट पार्टी के साथ माकपा भी साथ आ गई है। पर ज्यादातर सीटों पर किसी तरह का टकराव न हो यह प्रयास किया गया है जो काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।
उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी ने कहा -आगामी विधान सभा चुनाव के लिए हमने १७५ उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है उसमे उलेमा काउंसिल ७० सीटों पर लड़ने के साथ नव भारत निर्माण पार्टी को ४९ सीटों पर ,माकपा १७ सीटों पर ,जन संघर्ष मोर्चा के घटक दलों में क्रांतिकारी समता पार्टी १७ सीटो पर राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी सात सीटों और सोशलिस्ट पार्टी आफ इंडिया को १८ सीटों पर समर्थन किया जाएगा । काउंसिल बाकी २२८ सीटों की सूचि भी जल्द जारी करेगी ।इसके साथ ही रशादी ने कहा कि उलेमा काउंसिल उत्तर प्रदेश में वामपंथियों ,समाजवादियों ,अम्बेडकरवादी और जनवादी ताकतों के साथ मिलकर विश्वसनीय राजनीति के लिए काम करेगी । उलेमा काउंसिल का उभर लोकसभा चुनाव में दिख चुका है और यह पूर्वांचल के कुछ इलाकों में अपना आधार बनाए हुए है जिसके चलते कांग्रेस ने भी इसका साथ लेने का प्रयास किया था । इस गठबंधन के चलते ही माकपा तीन सीटों आजमगढ़ की मेहनगर ,चंदौली की चकिया और इलाहाबाद की कोरांव सीट पर मुकाबले में आ गई है जहाँ काउंसिल का मुस्लिम जनाधार है । मुस्लिम राजनीति को दो महत्वपूर्ण ताकतों पीस पार्टी और उलेमा काउंसिल में यह एक बड़ा फर्क दिख रहा है कि एक तरफ जहाँ पीस पार्टी बाहुबलियों और बदमाशों का गुरुकुल बन गई है वही उलेमा काउंसिल समाजवादी और जनवादी ताकतों के साथ खडी हुई है ।
जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने जनसत्ता से कहा -हम लोगों ने जो पहल की है उससे वाम ताकतों को नया जीवन मिलने जा रहा है । यह नया राजनैतिक उभार है जब मुसलमान उलेमा काउंसिल के झंडे तले जनवादी ताकतों के साथ खड़ा हुआ है जो आने वाले समय में नया बदलाव लाएगा । दूसरी तरफ पीस पार्टी जो अजित सिंह से लेकर कांग्रेस तक हर दरवाजे का चक्कर काट कर अब माफिया और अपराधियों की शरणगाह बन गई है उससे लोगों का मोहभंग हो चुका है और वह अपनी ताकत खोटी जा रही है ।उन्होंने यह भी कहा कि वाम दलों के उम्मीदवारों के बीच कोई टकराव न हो यह हर हाल में देखा जाएगा । भाकपा हो या भाकपा माले उनके आधार वाले इलाकों में कोई उम्मीदवार न खड़ा हो यह देखा जा रहा है ।
दरअसल उत्तर प्रदेश में वाम ताकतें तीन खेमों में बंट गई है जिनमे एक तरफ भाकपा ,फॉरवर्ड ब्लाक आदि है तो दूसरी तरफ जन संघर्ष मोर्चा के घटक दल के साथ माकपा और उलेमा काउंसिल है तो तीसरी तरफ भाकपा माले है । भाकपा नेता डाक्टर गिरीश ने कहा - असली वाम ताकते हमारे साथ है और हमारे बीच कोई टकराव भी नही है । जिन लोगों के साथ पहले भी कोई संबंध नहीं रहा उनके साथ इस बार भी नहीं है । jansatta

Thursday, January 5, 2012

मोर्चा संभालने जा रही प्रियंका गांधी


लखनऊ, जनवरी। कांग्रेस, उत्तर प्रदेश में अब पूरी ताकत झोंकने जा रही है । दो दिन बाद राहुल गांधी पूर्वांचल के दौरे पर निकल रहे है तो जनवरी के दूसरे सप्ताह में प्रियंका गांधी रायबरेली व अमेठी यानी छत्रपति साहूजी महाराज नगर में चुनावी मोर्चा संभालने जा रही है । प्रियंका गांधी इन दोनों जिलों से बाहर नहीं जाएंगी। पर देश और प्रदेश का मीडिया बाहर से वहां पहुँच जाएगा। जिससे वे ख़बरों के केंद्र में रहेंगी । इससे पहले राहुल गांधी पूर्वांचल में माहौल बना चुके होंगे । जबकि पश्चिम में लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित सिंह के अलावा कांग्रेस रसीद मसूद समेत कई नेताओं को प्रचार में उतारने जा रही है। पूर्वांचल में पीएल पुनिया,बेनी प्रसाद वर्मा से लेकर राजबब्बर तक कमान संभालेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव राहुल गांधी अपने उत्तर प्रदेश के आगामी पांच दिवसीय दौरे 7 जनवरी से 11जनवरी के तहत दिनांक 7 जनवरी को गोरखपुर पहुंच रहे
हैं। राहुल गांधी के दिनांक 7 जनवरी व 8 जनवरी का विधानसभावार दौरे के प्रथम दिन दिनांक 7जनवरी को गोरखपुर जनपद में विधानसभा क्षेत्र 321.पिपराइच में आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके विधानसभा क्षेत्र 323.गोरखपुर ग्रामीण के खोराबार में विधानसभा क्षेत्र 327.बांसगांव (सु0) के कौड़ीराम में व विधानसभा क्षेत्र 328 चिल्लूपार के गोलाबाजार में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
गांधी अपने दौरे के दूसरे दिन 08 जनवरी को जनपद गोरखपुर के विधानसभा क्षेत्र 326 चौरीचौरा के चौरीचौरा में जनपद देवरिया के विधानसभा क्षेत्र 336 रूद्रपुर के रूद्रपुर में विधानसभा क्षेत्र 339 रामपुर कारखाना के बैकुन्तपुर में 337.देवरिया विधानसभा क्षेत्र के देवरिया में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। गांधी अपने दौरे के तीसरे दिन 09 जनवरी को देवरिया व मऊ जनपद व चौथे दिन दिनांक 10 जनवरी को मऊ व आजमगढ़ जनपद में जनसभाएं करेंगे।
दूसरी तरफ राहुल के मिशन 2012 को सफल बनाने के लिए प्रियंका वाड्रा भी जनवरी के दूसरे सप्ताह में चुनाव प्रचार करेंगी । अभी तक अपने को अमेठी व रायबरेली तक सीमित रखने वाली प्रियंका अन्य क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार के लिए तैयार हो गई हैं। और पहले दौर में 13 व15 जनवरी को चुनाव प्रचार अभियान को अंजाम देने के लिए अमेठी व रायबरेली का दौरा करेंगी। कांग्रेस पार्टी ने अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची को भी निर्वाचन आयोग को सौंप दी है। जिसमे प्रियंका वाड्रा का भी नाम सम्मिलित है।

डीपी यादव को लेकर मोहन सिंह टाए गए

अंबरीश कुमार
लखनऊ , जनवरी । समाजवादी पार्टी ने बाहुबली डीपी यादव के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के एलान के बावजूद पार्टी महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन सिंह की टिपण्णी को लेकर कड़ा फैसला करते हुए आज उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया । अखिलेश यादव ने साफ कहा था कि डीपी यादव के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है । इसके बावजूद मोहन सिंह ने टिपण्णी कर दी थी कि इस मामले पर विचार होना है ,जिससे सपा नेतृत्व के फैसले को लेकर सवाल उठने लगा था और राजनैतिक हलकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी । गौरतलब है कि डीपी यादव को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं की राय अखिलेश यादव की राय से अलग थी जिसमे कई पुराने क्षत्रप भी शामिल है । मामला सिर्फ एक बाहुबली का नहीं था बल्कि आधा दर्जन बाहुबली विभिन्न क्षत्रपों के जरिए पार्टी में आने की कोशिश कर रहे थे ।
भ्रष्टाचार को लेकर जहां भाजपा फंसती जा रही है वही समाजवादी पार्टी के युवा चेहरे अखिलेश यादव के तेवर से वे बाहुबली सकते में है जो सपा में आने का रास्ता ढूंढ़ रहे है । बाहुबली डीपी यादव को लेकर पार्टी में जो शीत युद्ध चल रहा था उसमे अंततः जीत अखिलेश यादव की हुई और सबक उन आधा दर्जन बाहुबलियों को मिला जो अन्य क्षत्रपों के जरिए पार्टी में आने की कोशिश कर रहे थे । समाजवादी पार्टी की नई छवि राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है । उत्तर प्रदेश के मौजूदा राजनैतिक माहौल में समाजवादी पार्टी फिलहाल सबसे आगे है और कोई भी गलती करने का जोखम वह उठाना नहीं चाहती इसलिए मुलायम सिंह यादव फूंक फूंक कर कदम रख रहे है । भाजपा के कुशवाहा कांड से सही सबक समाजवादी पार्टी ने लिया है जिसने अपनी साख की कीमत पर कोई फैसला न करने का मन बना लिया है । यही वजह है कि डीपी यादव को लेकर शब्दों के चयन में जो गलती पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और खांटी समाजवादी मोहन सिंह से हुई उसकी भरपाई फ़ौरन की गई और इसका संदेश साफ़ था । मोहन सिंह की जगह प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव को जैसे ही राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाने का एलान हुआ लखनऊ में समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर मीडिया का जमावड़ा लग गया । पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव जो उस समय मुख्यालय में थे वे मीडिया से बिना मिले चले गए ।
बाद में प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा -प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है । मोहन सिंह महासचिव बने रहेंगे । राजेंद्र चौधरी ने इससे ज्यादा कुछ कहने से इंकार कर दिया। पर पार्टी सूत्रों का मानना है कि यह कदम प्रदेश अध्यक्ष की गरिमा को देखते हुए उठाया गया जो पार्टी में किसी भी बाहुबली और दागी नेताओ को लाने का विरोध कर रहे है । उनके बयान दे देने के बाद किसी भी पदाधिकारी की टिप्पणी गैर जरुरी थी इसी वजह से मोहन सिंह को लेकर यह फैसला करना पड़ा । राष्ट्रीय प्रवक्ता के हटाए जाने का जो बयान आज जारी हुआ वह प्रदेश प्रवक्ता की तरफ से था जिसमे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के फैसले की जानकारी दी गई थी । पर इसका राजनैतिक संदेश पार्टी के उन क्षत्रपों के लिए है जो बाहुबलियों का रास्ता बना रहे थे ।jansatta

Wednesday, January 4, 2012

भाजपा के गले की हड्डी बन गए मायावती के दागी मंत्री और बाहुबली !


अंबरीश कुमार
लखनऊ ,४ जनवरी ।मायावती सरकार के बाहुबली नेता और दागी मंत्री अब भाजपा के गले की हड्डी बन गए है। इनमे बाबू सिंह कुशवाहा को लेकर पार्टी में दो खेमे हो गए है जो लखनऊ से दिल्ली तक नजर आ रहे है। कल कुशवाहा को भाजपा में लिया गया और आज सीबीआई छापे के साथ ही पार्टी नेताओं की स्थिति सांप छछूंदर वाली हो गई। भाजपा सूत्रों के मुताबिक पहले तय हुआ कि कुशवाहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए पर बाद में उन्हें ढोने का ही फैसला इस शर्त के साथ हुआ कि ऊन्हे चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा ,हालांकि वे विधान परिषद के सदस्य है इसलिए यह तर्क भी जल्दी किसी के गले नहीं उतरने वाला । नीति ,नीयत और नैतिकता का नारा देने वाली भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य आईपी सिंह ने जनसत्ता से कहा -हमारे नेता अन्ना हजारे के मंच पर जाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का एलान करते है तो आडवानी पूरे देश में अलख जागते है और उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े मामले के सबसे बड़े अभियुक्त बाबू सिंह कुशवाहा को हम पार्टी में शामिल कर किस मुंह से जनता के बीच जाएंगे । इस मामले में प्रदेश के कुछ नेताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व को अँधेरे में रखा है । क्योकि कुशवाहा ने कांग्रेस से लेकर सपा तक में संभावना तलाशी पर जब कही जगह नहीं मिली तो वे भाजपा में आए । अब भाजपा का एक खेमा कुशवाहा के बचाव में जुटा है । भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा अब पार्टी को सौ प्याज खाने के बाद सौ जूते खाने वाली कहावत को चरितार्थ करना पड़ रहा है । गौरतलब है कि जब भाजपा कुशवाहा को पार्टी में शामिल कर रही थी उसी समय समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एलान किया कि उनकी पार्टी में बाहुबली डीपी यादव के लिए कोई जगह नहीं है । यह वही समाजवादी पार्टी है जिसके बारे में २००६ से पहले उत्तर प्रदेश में नारा लगता था -जिस गाड़ी पर सपा का झंडा उस गाड़ी में बैठा गुंडा। इस नारे का सबसे ज्यादा प्रचार तब राजबब्बर ने वीपी सिंह के आन्दोलन में किया था । इसी वजह से मुलायम सिंह की सरकार बदनाम हुई और सत्ता से जाना पड़ा था । उत्तर प्रदेश में किस तरह पार्टियां अपनी छवि बदल रही है यह इसका उदाहरण है। अखिलेश यादव के इस एलान का सोशल नेटवर्किंग साइट पर भी स्वागत हुआ। डीपी यादव को पार्टी में लाने का प्रयास आजम खान ने किया था जो न सुनने के आदि नहीं है । ऐसे में सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा के चलते भाजपा की फजीहत से सबक नहीं लिया तो सपा भी संकट में फंसेगी। इसकी मुख्य वजह वह नै पीढी है जो मंडल और कमंडल के बाद की है और राजनीति में भय और भ्रष्टाचार के खिलाफ है। अन्ना के आन्दोलन के बाद यह सवाल तो खड़ा ही हुआ है कि राजनीति में दागी लोगो को जगह नहीं दी जाए । भाजपा तो अन्ना आन्दोलन की भी प्रबल समर्थक रही और अब मायावती के चार दागी मंत्री को पार्टी में लेने के बाद बाहुबलियों को टिकट देने की तैयारी में है । भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह के पुत्र जेल में धनंजय सिंह से मिले तो उनके परिजन को टिकट देने की चर्चा हुई । सीडी कांड से मशहूर दूसरे संघ के बड़े नेता ने दिल्ली के नार्थ एवेन्यू में डीपी यादव से मुलाकात की ।पूर्वांचल के एक अन्य बाहुबली के भतीजे को भी टिकट देने की चर्चा है । यही वजह है कि आज बसपा ने भी नसीहत को नसीहत दी ।
बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा - वास्तविकता यह है कि शुचिता और ईमानदारी का दम्भ भरने वाली भाजपा अब भ्रष्टाचारियों और अपराधियों की शरणस्थली बन गयी है। बसपा से निकाले गए आपराधिक, दागी और भ्रष्ट नेताओं का विपक्षी दल खुलकर स्वागत और सम्मान कर रहे हैं। जनता ऐसी दोहरे चरित्र वाली पार्टियों के बारे में पूरी तरह समझ चुकी है। jansatta

Tuesday, January 3, 2012

सामने आ गया भाजपा का असली चाल, चरित्र और चेहरा

अंबरीश कुमार
लखनऊ ,३ जनवरी ।चुनाव से पहले ही भाजपा का चाल ,चरित्र और चेहरा का नारा सामने आ गया है। मायावती सरकार के चार दागी मंत्रियों बाबू सिंह कुशवाहा ,अवधेश वर्मा ,दद्दन मिश्र और बादशाह सिंह को पार्टी में लाकर भाजपा नेताओं ने भय और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई की खुद ही पोल खोल दी है। चार दागी मंत्री तो आए ही अब पार्टी जेल में बंद जौनपुर के बसपा सांसद धनंजय सिंह से तार जोड़ चुकी है । मायावती सरकार के जो मंत्री भाजपा में शामिल हुए है उनमे एक मंत्री पर एक अल्पसंख्यक लड़की के बलात्कार का आरोप लगा था तो दूसरे के पुत्र और सुरक्षा गार्ड समूची एटीएम मशीन उठाकर ट्रक में लाद ले गए थे और पुलिस को छापा मरना पड़ा था । तीसरे बाबू सिंह कुशवाहा वही मंत्री है जिनको हटाने के लिए भाजपा लगातार मांग कर रही थी और पार्टी के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने तो बाकायदा दो दर्जन कंपनियों की सूची जारी कर उनके भ्रष्टाचार पर रौशनी डाली थी। सदन में भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा था -कुशवाहा तो मायावती के कलेक्शन एजंट है और खनन के ठेकों में इनका हिस्सा है । चौथे बादशाह सिंह बुंदेलखंड में काफी समय से बाहुबल के प्रतीक है और लोकायुक्त के दायरे में भी आ चुके है। इन सभी दागी मंत्रियों को पार्टी में लाने बाद एक राष्ट्रीय नेता ने कहा -भाजपा गंगा सामान है जिसमे नदी नाले मिलकर शुद्ध हो जाते है । दूसरी तरफ लखनऊ में मायावती के मुह्बोले भाई की भूमिका निभा चुके लालजी टंडन ने कहा -भाजपा ओपन पार्टी है कोई भी इसमे आ सकता है ।
मायावती सरकार के दागी मंत्रियों और बाहुबलियों को पार्टी में लाने पर भाजपा में ही तूफ़ान मच गया है। माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष नीतिन गडकरी के सर्वे को ठेंगा दिखाते हुए किरीट सोमैया को भी उनकी हैसियत बता दी गई है जो कुशवाहा के खिलाफ अभियान छेड़े हुए थे । इन घटनाओं से संघ के नेता भौचक है जो राजनीती में नैतिकता ,शुचिता और जवाबदेही की बात करते थे ।
भाकपा के वरिष्ठ नेता अशोक मिश्र ने कहा -अब भाजपा के नेताओं का असली चाल ,चरित्र और चेहरा सामने आ गया है । कल तक ये लोग राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के घोटाले और उससे जुडी हत्यायों के बाद कुशवाहा के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग करते थे । तब इनका आरोप था कि कुशवाहा के यहाँ नोट गिनने की मशीन लगी हुई है ,पर अब लगता है वह मशीन समेत कुशवाहा को पार्टी में ले आए है । अब ये पार्टी किस मुह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे और धनंजय सिंह के परिजन को चुनाव लड़ाकर कौन सा सन्देश देंगे ।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने कहा कि बसपा जिसे निकालती है। भाजपा उसे अपनाती है। भ्रष्टाचार के आरोप में जिन दो मंत्रियों को बसपा ने निकाला है। भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे भाजपा व बसपा की अंदरूनी सांठगांठ उजागर हुई है। कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने कहा कि भाजपा ने जो सूची अभी जारी की है उसमें बसपा सरकार के भ्रष्टाचार के आरोपी दो दागी मंत्री, प्रदेश के पूर्व मंत्री व दागी विधायक अवधेश वर्मा व ददन मिश्र जिन्हें बसपा ने मंत्रिमंडल व पार्टी से बाहर कर दिया था। भाजपा ने उन मंत्रीयों को प्रदेश के पूर्व मंत्री व दागी विधायक अवधेश वर्मा को शाहजहांपुर की ददरौल सीट से व दद्दन मिश्र को भिनगा सीट से भाजपा के उम्मीदवार घोषित किए गए। मदान ने कहा कि इससे भ्रष्टाचार के विरूद्ध कोरी आवाज उठाने व थोथा आरोप लगाने वाली भाजपा का दो मुंहा चरित्र उजागर हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में सदैव अंतर रहा है। jansatta