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Tuesday, February 28, 2017

कालीकट का समुद्र तट

अंबरीश कुमार अभी अभी अख़बार में सोनल मान सिंह का एक लेख पढ़ा तो उनसे हुई पुरानी मुलाक़ात याद आ गई .कालीकट भी याद आया और उमेश सिंह चौहान साहब भी .यही वह शहर है जहां पुर्तगाल से आकर वास्को डी गामा उतरा था .देश में पुर्तगालियों का प्रवेश द्वार .फोटो में वह समुद्र तट भी है तो वास्को का स्मारक भी . नब्बे के दशक की बात है .कालीकट महोत्सव देखने के लिए चेन्नई से कालीकट पहुंचे थे ट्रेन से .सुबह के पांच बजे थे .विश्विद्यालय के पुराने साथी और कालीकट के कलेक्टर चौहान साहब स्टेशन आए थे .नई जगह थी इसलिए उनके आने से सुविधा हो गई .बताया कि वे घंटे भर भर पहले आए थे फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि को लेने .वे ही आयोजक थे इसलिए दौड़ धूप भी कर रहे थे .शहर के बीच का होटल था नाम संभवतः मालाबार पैलेस था .लाबी में प्रवेश करते ही पानी के पुराने जहाज का बड़ा सा माडल रखा हुआ था .आकाश के लिए यह अजूबा सा था इसलिए वहां से हटा तो विशाल एक्युरियम में शार्क मछली देखने लगा .हम लोग ऊपर की दूसरी मंजिल पर रुके हुए थे .बगल में नौशाद ,नृत्यांगना सोनल मानसिंह और मीनाक्षी शेषाद्रि भी .नौशाद से यही शाम को मुलाकात हुई .लखनऊ से लेकर मुंबई के किस्से सुनाने लगे .अच्छा लगा उनसे मिल कर .फिल्म ,साहित्य और संगीत नृत्य के क्षेत्र में अपनी कोई खास जानकारी नहीं रही है .आम दर्शक की तरह ऐसे मशहूर लोगों से मिलकर अच्छा लगता है . रात को बताया गया कि डिनर सोनल मान सिंह के साथ नीचे रेस्तरां में है .हम कुछ मिनट पहले पहुंच गए थे .कुछ देर में सोनल मानसिंह भी आई .परिचय पहले ही हो चुका था .उन्होंने सरसों में बनी मछली और चावल मंगाया .बताया कि कई घंटे की मेहनत के बाद उनका प्रिय भोजन यही होता है .सविता उनसे नृत्य की शुरुआत के बारे में देर तक बात करती रही .कई घंटे तक रियाज करना फिर कार्यक्रम .यह कार्यक्रम समुद्र तट पर था जिसकी रिपोर्ट भी जनसत्ता मे दी थी हालांकि नृत्य संगीत के कार्यक्रम के बारे में पहले कभी लिखा नहीं था .इस दौरे में ही वह समद्र तट देखा जहां पुर्तगाल से आकर वास्को उतरा था .वह अकेले नहीं आया एक संस्कृति के साथ आया जिसने तटीय इलाकों में बहुत कुछ बदल दिया .खानपान ,वास्तुशिल्प से लेकर रीति रिवाज तक . गोवा उदाहरण है .

Tuesday, March 3, 2015

समुद्र तट पर बढ़ता संकट

समुद्र तट पर बढ़ता संकट अंबरीश कुमार कुछ वर्ष पहले तक देश के कई द्वीप और पहाड़ी क्षेत्र सैलानियों के लिए प्रतिबंधित थे पर बाद में उन्हें भी पर्यटन के नाम पर खोल दिया गया ।इनमें लक्ष्यद्वीप ,अंडमान निकोबार से लेकर लद्दाख और पूर्वोत्तर के कई अंचल शामिल थे । पर कुछ ही समय में पर्यटन के नाम पर इन क्षेत्रों का जिस तरह अंधाधुंध व्यावसायिक दोहन हुआ उससे सभी जगह कई तरह की समस्या सामने आने लगी है ।इसमें सबसे बुरा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है । इन द्वीप के साथ समुदी तट पर भी संकट बढा है । पुरी ,विशाखापत्तनम ,चेन्नई से पांडिचेरी ,केरल के कोवलम से लेकर कन्याकुमारी के समुद्र तटों पर जिस तरह अतिक्रमण बढ़ रहा है उसे देखते हुए नहीं लगता कि एक दो दशक बाद ये खुले समुद्र तट बच पाएंगे ।पहले समुद्र तट पर निर्माण की दूरी पांच सौ मीटर थी जिसे कई जगहों पर घटा कर दो सौ मीटर कर दिया गया है ।इसके बावजूद चाहे पुरी का समुद्र तट देख ले या कोवलम का बीस से पचास मीटर दूरी तक निर्माण नजर आ जाएगा ।समुद्र तटों की सुरक्षा के लिए बना तटीय नियमन क्षेत्र कानून भी इसे रोक नही पा रहा है ।लक्ष्य द्वीप का मशहूर बंगरम द्वीप वर्षों से एक होटल समूह के पास है और इस द्वीप तक पहुँचने के लिए कवरेती और अगाती द्वीप तक जाना होता है ।पिछले दो दशक में इन दोनों द्वीप के आसपास का पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो चूका है जिसका असर समुद्री जीव जंतुओं पर भी पड़ चुका है । वजह समुद्री जहाजों का बढ़ता फेरा और हवाई यातायात भी है ।यहां पर नारियल और पपीता के अलावा कुछ नहीं होता और सारा सामान पहले बड़े समुद्री जहाज और फिर मोटर बोट के जरिए इस द्वीप तक लाया जाता है । दिनभर में कई बार इन मोटर बोट का आना जाना होता है और इनका कचरा भी गहरे समुद्र से लेकर लैगून में ही फेंका जाता है ।समुद्र तटों के किनारे बसे रिसार्ट हो या द्वीप में यह एक बड़ी समस्या है जिसके चलते इनके आसपास का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है , यह एक बानगी है और कई द्वीप इस संकट से जूझ रहे है ।दूसरी तरफ तटीय राज्यों में स्थिति और बदतर होती जा रही है ।कोवलम समुद्र तट केरल का सबसे खुबसूरत तट माना जाता है पर अब पहले जैसी प्राकृतिक खूबसूरती नजर नहीं आती ।इस तट पर इस कदर अतिक्रमण हुआ है कि कोस्टल रेगुलेशन जोन यानी तटीय नियमन क्षेत्र अध्यादेश के उलंघन की करीब दो हजार शिकायते आ चुकी है ।यह हाल सभी तटीय राज्यों का है ।ओडिशा में समुद्र तट पर होटलों के बढ़ते अतिक्रमण को लेकर अदालत को दखल देना पड़ा तो गोवा में प्रभावशाली नेताओं से लेकर कई बिल्डरों के खिलाफ मामला चल रहा है । समुद्र तटों पर सैलानियों की बढती संख्या से पर्यटन उद्योग तेजी से फल फूल रहा है तो इसके चलते अवैध अतिक्रमण भी बढ़ रहा है ।गोवा के समुद्र तटों पर अवैध कब्जे की घटनाएं लगातार बढती जा रही है ।एक तरफ होटल और रिसार्ट इन तटों पर तेजी से खुल रहे है तो दूसरी तरफ आवासीय योजनाएं । विशाखापत्तनम में समुद्र तट के किनारे से गुजरने वाली सड़क पर बहुमंजिली इमारतों की कतार खड़ी हो चुकी है और ये इस शहर का सबसे महंगा रिहायशी इलाका माना जाता है । समुद्र तट पर बसे हर शहर की यही स्थिति है ।पर इसका दूसरा और दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह भी है कि इनका सारा कचरा भी समुद्र में बहाया जा रहा है । चाहे समुद्र तट पर बसे रिसार्ट और होटल हो या एपार्टमेंट ,आम तौर पर इनका कचरा सीवर लाइन के जरिए समुद्र में डाला जा रहा है ।देर सब्स्र इसका घातक परिणाम हमें भुगतना होगा ।साभार -दैनिक हिंदुस्तान

Monday, April 28, 2014

चुनाव में दमण का समुद्र तट बचाने की गुहार लगा रहे है माछीमार किसान

लोकसभा चुनाव में पर्यावरण भी मुद्दा बन गया दमण से अंबरीश कुमार दमण ।पश्चिमी भारत के इस समुद्र तट पर आज शाम चुनाव का शोर ख़त्म हो चूका है । अब वोट पड़ने का इन्तजार है जो नदी और समुद्र को बचने के नाम पर माँगा जा रहा है ।यह जगह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योकि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विकास का नारा यहाँ के लोगों के लिए त्रासदी बन गया है । गुजरात के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर वापी के जहरीले कचरे की वजह से अरब सागर का एक हिस्सा बुरी तरह प्रदूषित हो चूका है ।दोनों मुख्य नदियाँ भी प्रदूषित हो चुकी है ।जिसके चलते यहाँ का मछुवार समाज लगातार आक्रोशित रहा है और आज शाम तक की चुनावी सभाओं में यह मुद्दा उठा ।कांग्रेस प्रत्याशी केतन पटेल ने आज कहा कि दमण-दीव का विकास पांच वर्ष से बाधित हो चुका है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पडोसी धर्म निभाने की बात पिछले चुनाव में की थी परंतु पडोसी धर्म निभाने की बात तो दूर रही उन्होंने हमारे माछीमार भाईयों को प्रदूषण भेंट में दिया है। दमण गंगा एवं कोलक नदी के प्रदूषण से अनेक बीमारियां फैल रही है।इससे अगर निजात नहीं पाया गया तो मछुवारों का इस इलाके में अस्तित्व ही ख़त्म हो जाएगा ।यह मुद्दा दमण में गरमा चूका है ।यहाँ से कांग्रेस के उम्मीदवार केतन पटेल है तो भाजपा के उम्मीदवार लालू पटेल।यह एक ऐसा चुनाव क्षेत्र है जहाँ पर्यावरण मुद्दा बन गया है क्योकि नदी और समुद्र का पानी जहरीला होता जा रहा है ।रविवार को कांग्रेस के उम्मीदवार केतन पटेल का जुलूस यहाँ मशाल चौक से तीनबत्ती, चार रास्ता, झांपाबार, बस डिपो, खारीवाड, झरीमरी माता, सुप्रीम अपार्टमेंट से कॉलेज रोड होते हुए मशाल चौक पहुंचा तो हजारों समर्थक इकठ्ठा हो चुके थे । इस मौके पर कांग्रेस नेता विशाल टंडेल ने कहा कि मैं कांग्रेस का वफादार सैनिक था और हूँ आज कांग्रेस के उम्मीदवार केतन पटेल को मजबूत सहयोग देने के लिए उतारते है तो समाज के अस्तित्व का प्रश्न हल होगा। क्योंकि पांच वर्ष में दमण-दीव के सांसद ने कुछ किया नहीं और उनके पक्ष के ही लोग आज उनको छोडकर जा रहे है। ऐसी परिस्थिति में ऐसे लोग आपका प्रतिनिधित्व किस तरह से कर सकते है। गुजरात की लहर की बात करने वालों को जबाव देते हुए विशाल टंडेल ने कहा कि हमारे माछीमार समुद्री किसान है। रोज-रोज नई लहर देखते है ये किसी एक लहर पर रूक जाएँ तो ये भूल होगी। माछीमार किसान गुजरात के जहरीले कचरे से बर्बाद हो रहा है ।हमारी नदी और समुद्र को वे जहरीला बना रहे है । गौरतलब है कि दमण की जीवन रेखा दमण गंगा नदी गुजरात के वापी शहर में लगे उद्योगों के कचरे की वजह से जहरीली हो चुकी है ।इस वजह से यहाँ का मछुवारा समाज जो अपने को माछीमार समुद्री किसान कहता है वह आंदोलनरत है ।कांग्रेस इनके साथ है और उसके उम्मीदवार के लिए माछीवाड के सभी बडे समूह एक साथ आ गए है ।कांग्रेस नेताओं ने नानी दमण जेटी स्थित माछीमारों के हॉल से माछीमारों संग बैठक कर चुनाव प्रचार शुरू किया था । माछी समाज का यहाँ नारा है पडोसी धर्म निभाने वालों ने दमण के माछी समाज को प्रदूषण भेंट किया । ऐसी ही एक बैठक जो समुद्र नारायण मंदिर के पास हुई उसमे कांग्रेस नेता विशाल टंडेल ने कहा कि आज समाज की कोई समस्या हो तो उसकी मांग करने की जिम्मेदारी सांसद की होती है, प्रतिनिधि सक्षम होना चाहिए परंतु कमजोर प्रतिनिधि को देखकर दिल्ली के अधिकारी अपने ऊपर राज करते है। आज प्रशासन की दादागिरी इस तरह बढ गई है कि एक शराब की एक बोतल भी ले जाने पर केस करने की धमकी दी जा रही है। ऐसे प्रशासन को सबक सिखाने की जरूरत है। माछी समाज जिसको चाहती उसे चढती है और चाहे तो उसे उतार सकती है मैं भी माछी समाज का हूं जिसका मुझे गर्व है। यह माछी समाज ही वापी के उद्योगों के जहरीले कचरे का ज्यादा शिकार हुआ है ।नानी दमन के एक मछुवारा परिवार की आशा ने कहा - कचरे के चलते नदी में मछलियाँ ख़त्म हो गई है और समुद्र का बड़ा हिस्सा ख़राब हो गया है ।पहले तो आसपास से मछली मिल जाती थी पर अब बहुत दूर जाना पड़ता है ।इसलिए हम सब कांग्रेस का साथ दे रहे है ।भाजपा के नेता ने तो कोई काम ही नहीं किया ।आप पीने का पानी भी दमण में नहीं मिलता है । दरअसल दमण की अर्थव्यवस्था पहले मूल रूप से मछली के व्यवसाय पर ही निर्भर थी ।पर अब मछुवारों का पलायन तेजी से हुआ है और वे अन्य धंधों कि और चले गए है ।इसकी मुख्य वजह नदी और समुद्र का प्रदूषण है ।इसका असर अब पर्यटन उद्योग पर भी पड़ने लगा है ।ऐसे में चुनाव में अगर पर्यावरण एक मुद्दा बन गया है तो यह शुभ संकेत है लोकतंत्र के लिए ।जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

Monday, April 14, 2014

समुद्र तट पर कुछ दिन

समुद्र तट पर कुछ दिन अंबरीश कुमार सूर्योदय देखने की वजह से सुबह पांच बजे ही नींद खुल गई थी ।खिड़की से पर्दा हटाया तो बाहर अँधेरा छंटता नजर आया । समुद्र तट सामने ही था इसलिए एक कप काफी पीने के बाद बाहर निकलने का कार्यक्रम बना । यह महाबलीपुरम में तमिलनाडु पर्यटन विभाग का रिसार्ट था जंहा कई बार रुकना हुआ है ।चेन्नई से करीब पचास किलोमीटर दूर यह जगह काफी खुबसूरत है । मुख्य सड़क और शहर से दूर होने की वजह से शांत भी है ।पांडिचेरी जाने से पहले महाबलीपुरम में रुकने का कार्यक्रम बना था । करीब तेइस साल बाद उसी काटेज के आगे बैठा था जहां पहली बार रुका था । बहुत कुछ याद आने लगा ।महाबलीपुरम में तमिलनाडु पर्यटन के इस रिसार्ट में बहुत ज्यादा फर्क नहीं आया है ।वैसा ही जंगलों में घूमते हुए जाने का अहसास इस बार भी हुआ जो पहली बार हुआ था ।सागर की लहरे जब पैर को भीगा कर लौटी तो मुठ्ठी भर रेत बटोर ली । कुछ सीपियाँ भी आ गई जिन्हें घर ले आया हूँ ।इस समुद्र ने तब इतना डरा दिया था कि कोई उम्मीद भी नहीं बची थी । वर्ष १९९० में दक्षिण में विवाह के फ़ौरन बाद दक्षिण में करीब पखवाड़े भर घूमने का कार्यक्रम बना था और सीधे चेन्नई (जो तब मद्रास था ) पहुंचे थे । यह आमंत्रण दक्षिण के गाँधीवादी कार्यकर्ता और जयप्रकाश नारायण के सहयोगी शोभाकांत जी ने दिया था । सीधे उनके आवास गोविन्दप्पा नायकन स्ट्रीट पहुंचे । देर से पहुंचे थे और बरसात थम नहीं रही थी ।जाना था महाबलीपुरम पर शोभाकांत जी ने इस बरसात में जाने की इजाजत नहीं दी ,कहा सुबह गाड़ी से भिजवा देंगे ।बताया कि बहुत बड़ा तूफ़ान आ रहा है इसलिए कार्यक्रम रद्द करे और यही रुके । तूफान कि भविष्यवाणी यह थी कि मद्रास शहर का बड़ा इलाका डूब सकता है । पर साथ में यह भी जानकारी दी कि इस तरह की भविष्यवाणी हर साल होती है पर मद्रास तो बच जाता है नेल्लोर में लोग तबाह हो जाते है । सुबह भी मौसम वैसा ही था इसलिए दोपहर बाद जाने का कार्यक्रम बना और रिसार्ट के प्रबंधक को शाम तक पहुँचने की सूचना दे दी गई । समुन्द्र के किनारे किनारे जाने वाला महाबलीपुरम का रास्ता बरसात में देखते बनता था ।नारियल के घने जंगल हवा में लहराते नजर आ रहे थे ।तब तटीय इलाकों पर अतिक्रमण नहीं हुआ था इसलिए लगातार समुंद्र दिख रहा था और उंची लहरे भी । तमिलनाडु पर्यटन विभाग के रिसार्ट तक पहुँचते पहुंचे मौसम और खराब हो चुका था ।कैशुरिना के जंगलों के बीच से एक घुमावदार रास्ता रिसेप्शन के सामने खत्म हो जाता था जहाँ एक तरफ रेस्तरां था तो सामने श्रंखला में बने काटेज । मैनेजर हैरान था क्योकि अकेले हम ही ऐसे सैलानी थे जो आज पहुंचे थे बाकि सभी ने अपने कार्यक्रम तूफ़ान के चलते निरस्त कर दिए थे बहुत से कर्मचारी भी चले गए थे । मैनेजर ने हिदायत दी की अपने काटेज से बाहर बिलकुल ना जाए और समुन्द्र की और तो किसी कीमत पर नहीं । खाने का आर्डर अभी दे दे जो काटेज में सर्व कर दिया जाएगा । नाश्ता तो तब मिलेगा जब सुबह तक बच पाएंगे क्योकि तूफ़ान आधी रात के बाद महाबलीपुरम के तट तक पहुंचेगा । इस बात ने और डरा दिया ।तबतक कार भी जा चुकी थी और कोई चारा नहीं था ।खैर नीचे के काटेज में पहुंचे तो बेडरूम के सामने की दीवार कांच की थी और उसपर लगा पर्दा हटाते ही लगा मानो लहरें कमरे के भीतर तक आ जाएँगी । लगातार बरसात से ठंड बढ़ चुकी थी और पंखा चलाने की भी जरुरत नहीं थी ।अँधेरा हो चुका था और कुछ मोमबती दी गई थी इस खौफनाक रात का मुकाबला करने के लिए जहां सामने सी आती उंची उंची लहरे डरा रही थी ।समुन्द्र के पास बहुत बार रुका हूँ पर इतनी उंची लहरे कभी नहीं । सामने पल्लव साम्राज्य के दौर का मशहूर तट मंदिर लहरों औए बरसात में बहुत रहस्मय सा नजर आ रहा था ।नारियल के पेड़ों के झुण्ड तक लहरा रहे थे और सामने कैशुरिना के जिन दो पेड़ों पर आराम करने वाला झूला पडा था वह हवा के झोंके से ऊपर नीचे हो रहा था ।चारो ओर से आ रही तूफानी हवा की आवाज और कमरे के बाहर तक आतीं लहरे । खाना खाते खाते रात के दस बज चुके थे और बैरे के मुताबिक करीब साढ़े बारह बजे तक तूफ़ान के इस तट पर आने की आशंका थी ।मन अशांत था और तब मोबाइल भी नहीं होते थे और फोन लाइन भी शाम को खराब हो गई थी । खैर कब नींद आई पता नहीं चला ,उठा तो कमरे में रौशनी थी हालाँकि सूरज नहीं निकला था ।चाय के लिए बैरे को बुलाया तो पता चला तूफ़ान लेट हो गया है अब दस बारह घंटे बाद आएगा ।बहुत समय था और कई विकल्प भी । तूफ़ान का डर ख़त्म हो चूका था और बरसात थमते ही तट पर आ गए पर लहरों से दूर ही थे । अचानक एक बड़ी लहर आई तो ध्यान टूटा ।सामने सूरज समुद्र से आधा बाहर आ चूका था ।समुद्र तट पर रिसार्ट में रुके कुछ जोड़े भी अब बाहर आ चुके थे ।दाहिने की ओर 'शोर टेंपल ' के आसपास सैलानियों की भीड़ बढ़ने लगी थी ।नए साल की वजह से सैलानी ज्यादा थे ।रिसार्ट के समुद्र तट पर सुनामी के कहर का निशान जगह जगह दिख रहा था ।महाबलीपुरम जब पहली बार पहुंचा था तो यह छोटे से गांव की तरह नजर आया । एक पहाडी और उसके आसपास प्राचीन मंदिरों का शिल्प देखने वाला है । शिल्पकारों ने पहाड को तराश कर उन्हें न सिर्फ मंदिरों में बदला बल्कि तरह तरह कि आकृतियों में बादल डाला है । महाभारत की कई कहानियां यहाँ शिल्प में बदली जा चुकी है । पल्लव साम्राज्य की यह ऐतिहासिक धरोहर एक नही कई बार देखने वाली है । महाबलीपुरम बाजार से करीब आधा किलोमीटर दूर पर वह प्राचीन मंदिर है जिसके बाहरी हिस्से पर लगातार समुन्द्र की लहरे टकराती रहती थी और कई जोड़े वह बैठकर फोटो खिंचाते नजर आते थे । अब यह मंदिर परिसर घेरकर एक पार्क में तब्दील किया जा चुका था और मंदिर के बाहरी हिस्से के आगे पत्थर डालकर उसे सुरक्षित किया जा चुका था । जो पहले गाँव जैसा था वह अब एक कस्बे में बदल चुका था और दक्षिण भारतीय रेस्तरां के साथ बड़ी संख्या में चाइनीज और इंटरकांटिनेंटल रेस्तरां नजर आ रहे थे । विदेशी सैलानी तो पहले जैसे ही थे पर देसी सैलानियों कि संख्या काफी ज्यादा थी । महाबलीपुरम से निकले तो समुद्र के किनारे किनारे ही पांडिचेरी की तरफ बढ़ गए। पांडिचेरी जो अब पुद्दुचेरी कहलाता है ,उसका रास्ता महाबलीपुरम से ही होता हुआ जाता है ।दक्षिण के इस अंचल में कई खुबसूरत समुद्र तट है जो सैलानियों को पसंद आ सकते है और ऐसे समुद्र तट पर रुकना बहुत महंगा भी नहीं है ।महाबलीपुरम ,पांडिचेरी ,रामेश्वरम ,कन्याकुमारी से चलकर तिरुअनंतपुरम के समुद्र तट उदाहरण है । यदि दिसंबर जनवरी के पीक सीजन को छोड़ दे तो अमूमन डेढ़ दो हजार रुपए में रिसार्ट में जगह मिल जाती है । तमिलनाडु और केरल में पर्यटन विभाग के रिसार्ट मध्य वर्ग की जरूरतों के हिसाब से ही बनाए गए है । पांडिचेरी में तो अगर कुछ पहले योजना बनाकर जाएँ तो बहुत ही कम खर्च होता है क्योंकि अरविंदो आश्रम के गेस्ट हाउस में ठाह्रने और भोजन आदि का खर्च बहुत कम है । पांडिचेरी में अरविंदो आश्रम का पार्क गेस्ट हाउस समुद्र तट पर है। अरविंदो आश्रम के सभी अतिथि गृह में यह ज्यादा भरा रहता है सिर्फ समुद्र के किनारे होने की वजह से। पर यह आश्रम ही है कोई होटल नहीं। हर कमरे में माँ मीरा की बड़ी फोटो लगी रहती है। यहाँ से समुद्र का नजारा भी अद्भुत नजर आता है। मैं दूसरी मंजिल के उनतीस नम्बर कमरे में रुका हुआ हूँ और बच्चे पहली मंजिल के कमरा नंबर 44 में। अपना कमरा काफी बड़ा और आरामदेह है जबकि नीचे के कमरे छोटे हैं और वहाँ से समुद्र का वह दृश्य नहीं दिखता जो यहाँ से नजर आता है। चेन्नई से एक दिन पहले शाम यानी दो जनवरी को इस गेस्ट हाउस में पहुँचे थे। पहले ट्रेन फिर बहुत दिनों बाद बस से सफ़र करते हुये। सभी साथ थे। पर चेन्नई से ही तबियत ढीली थी। मैरीना बीच और महाबलीपुरम के समुद्र तट पर भी ठण्ड ही महसूस हुयी तो दवा लेनी पड़ी। यह सब सुबह-सुबह हलके कपड़े में समुद्र तट पर कई घण्टे गुजरने की वजह से हुआ। चेन्नई में इतनी ठण्ड सुबह हो जायेगी यह अंदाजा नहीं था। हालाँकि गोपालपुरम के लायड गेस्ट हाउस में ए.सी. लगातार चलता रहा क्योंकि इस तरह के कमरे में कोई खिड़की नहीं होती है। खैर ज्यादा हैरानी पुद्दुचेरी में रजाई गद्दा बिकता देख कर हुयी। हर कोई गर्म कपड़े पहने नजर आया साथ ही टोपी भी। दक्षिण में इतनी ठण्ड पहली बार लोगों ने महसूस की। हर साल की तरह इस बार भी नए साल पर बाहर था और समुद्र तट पर आराम करने के लिये आया था क्योंकि पिछले छह महीने से व्यस्तता काफी बढ़ गयी थी और लगातार दौरे हो रहे थे। लिखना भी कम हो गया था। इसलिये हफ्ता भर समुद्र तट पर रहना चाहता था। पर बुखार ने अपना कार्यक्रम काफी हद तक चौपट कर दिया। इस बार पांडिचेरी में चेट्टीनाड व्यंजनों का स्वाद लेना चाहता था और इसके लिये एक मित्र ने व्यवस्था भी कर दी थी। पर यह सम्भव नहीं हो पाया। सबके जाने के बाद एक कप कॉफी के साथ मै बालकनी में बैठ गया और समुद्र की तेज होती लहरों को देखने लगा। सामने नारियल के पेड़ों की कतार लहराती नजर आ रही थी। एक छोटा बच्चा समुद्र के किनारे काले पत्थरों पर अपनी माँ के साथ उछल-कूद करने में व्यस्त था। दाहिने तरफ की बीच रोड पर सैलानियों कि संख्या बढ़ती जा रही थी। फिर बैठे-बैठे ऊब जाने पर बाहर निकल आया। इस फ्रेंच रेस्तरां के आसपास चौपाटी जैसा नजारा था और ठेले से तली हुयी मछली की गंध चारों ओर फैली हुयी थी। तटीय शहरों में समुद्र तट पर सभी जगह यह नजारा दिखता है। साथ ही मदिरा की दुकानें भी। चेन्नई में तो इस तादात में मदिरा की दुकानें नहीं दिखती पर पुद्दुचेरी में हर चार कदम पर मधुशाला नजर आ जाती है और मदिरा की सेल भी लगी नजर आयी। विदेशी ब्रांड की कीमत यहाँ काफी कम है क्योंकि टैक्स में काफी छूट है। उसका असर समुद्र तट भी दिख जाता है पर कोई हुल्लड़ मचाता नजर नहीं आयेगा। खा ने-पीने के मामले में फ्रांसीसी संस्कृति का असर पुद्दुचेरी में साफ झलकता है। कई बार तो लगता है कि फ़्रांस के ही किसी शहर में घूम रहे हो। वास्तुशिल्प से लेकर बाजार की दुकानों और रेस्तरां होटल के नाम भी फ्रांसीसी हैं। ठीक उसी तरह जैसे गोवा पर पुर्तगाल का असर नजर आता है। पर यह शहर कुछ अलग जरूर है जहाँ भारी भरकम लक्जरी गाड़ियों की जगह साइकिल ज्यादा नजर आती है। शाम को तो बीच रोड पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाती है इसलिये सैलानी बेफिक्र होकर सड़क पर कई किलोमीटर तक घूम लेते हैं। बहुत से सैलानी समुद्र तट के किनारे पड़े पत्थरों पर बैठे नजर आते हैं। नए साल का यह दूसरा दिन है इसलिये नवविवाहित जोड़ों की संख्या भी ज्यादा है जिसमें उत्तर भारत वाले भी शामिल हैं। अन्य तटीय शहरों के मुकाबले काफी साफ़ सुथरा और किफायती शहर है। यहाँ पर खाना और रहना दोनों ही सस्ता है। अगर अरविंदो आश्रम के सबसे आलीशान पार्क गेस्ट हाउस में रुके तो छह सौ में सबसे बड़ा सूट जैसी जगह मिल जाती है जिसमें तीन-चार लोग आ सकते हैं। एक व्यक्ति का एक दिन का खाना नाश्ता आदि भी आश्रम के केंद्रीय भोजनालय में पचास रुपए में हो जाता है। पर यह सब आश्रम जैसा ही है। कोई रूम सर्विस नहीं है। खाने के लिये भी रेस्तरां में ही जाना पड़ेगा। मैं यात्रा में चाय काफी के लिये बिजली की छोटी केतली और उसका सामान साथ लेकर साथ चलता हूँ इसलिये सुबह चार बजे उठने पर कोई दिक्कत नहीं होती। वर्ना सुबह पार्क गेस्ट हाउस के रेस्तरां खुलने का समय ही सात बजे है। आश्रम का शायद यही अकेला रेस्तरां है जहाँ अंडा मिल जाता है वर्ना बाकी जगह शुद्ध शाकाहारी नाश्ता और खाना। सुबह सैलानी नाश्ता करने के बाद समुद्र तट पर पहुँच जाते है और देर तक बैठे रहते हैं।कादम्बनी में प्रकाशित लेख से