का बडबोलापन कांग्रेस के गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है । विधान सभा चुनाव में बेनी बाबू ने इसी तरह की टिपण्णी की और कांग्रेस को लगा कि बेनी के चलते अवध क्षेत्र में कुर्मी एकजुट हो जाएंगे और पार्टी को बहुत फायदा होगा क्योकि टिकट में भी उनकी चली थी । पर नतीजा आया तो कांग्रेस साफ़ थी और बेनी बाबू अपने पुत्र की जमानत तक नहीं बचा पाए थे । अब बेनी ने मुसलमानों को लेकर मुलायम के खिलाफ जो टिपण्णी की है उसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है । मुसलमानों के खिलाफ यही सबसे बड़ा हमला होता है कि वे आतंकवादियों का साथ देते है । आजमगढ़ के संजरपुर को तो आतंकवादियों की नर्सरी तक कहा जा चुका है । इसके बाद आजमगढ़ में कांग्रेस ने नेताओं ने विधान सभा चुनाव में जिस तरह के बयान दिए उससे मुसलमान आहत हुए और कांग्रेस को पूर्वांचल में इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा । अब जब पूर्वांचल में अल्पसंख्यक समुदाय आशंकित है तब बेनी की यह टिपण्णी हिंदू कट्टरपंथी ताकतों को ताकत देने वाली साबित हो रही है ।
बेनी के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि सिर्फ देवबंदी मुसलमान उनकी टिपण्णी से नाराज है और बरेलवी और शिया समुदाय खुश । क्योकि अखिलेश सरकार में इन दोनों की हिस्सेदारी बहुत कम है । पर यह तर्क अल्पसंख्यक समुदाय के गले के नीचे नहीं उतर प़ा रहा । मुसलमानों को आतंकवादियों का शुभचिंतक बताने का प्रचार राष्ट्रीय फलक पर हो रहा है और मुलायम सिंह के बहाने अगर बेनी ने भी वही काम किया है तो उसकी राजनीति को भी समझना होगा । अवध क्षेत्र में मुस्लिम राजनीति पर नजर रखने वाले रिजवान ने कहा -बेनी गोंडा से चुनाव लड़ेंगे और वह मुसलमानों का बरेलवी समुदाय है जिनका देवबंदियों से छतीस का आंकड़ा है इसलिए वे इस टिपण्णी से बेनी के साथ आ गए है । पर यह तर्क समूचे प्रदेश और देश की राजनीति के लिहाज से अलग नजर आ रहा है । आज उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने मुस्लिम नौजवानों ने बेनी का पुतला फूंका तो उसमे सभी शामिल थे । कांग्रेस के एक कार्यकर्त्ता परवेज ने कहा -जब राहुल गाँधी मुसलमानों को कांग्रेस के पक्ष में लेन का प्रयास कर रहे हो और प्रदेश में आतंकवाद के नाम गिरफ्तार निर्दोष नौजवानों को रिहा करने की मांग हो रही हो ऐसे में बेनी की यह टिपण्णी मुसलमानों को आहत करने वाली है और वे तो मुलायम सिंह को और मजबूत कर रहे है । ऐसी ही टिपण्णी से बेनी विधान सभा चुनाव में पार्टी का भठ्ठा बैठा चुके है ।
इस बीच समाजवादी पार्टी ने आज कहा कि कांग्रेस का एक केन्द्रीय मंत्री श्री मुलायम सिंह यादव पर बेहूदा आरोप लगाता है कि आतंकवादियों से उनके रिश्ते हैं। कांग्रेस हाईकमान ने झूठे और अनर्गल बयानबाजी करनेवाले मंत्री से अभी तक इस्तीफा नहीं लिया गया है। यह एक गम्भीर मसला है जिस पर कांग्रेस नेतृत्व की तीन दिनों से चुप्पी जताती है कि मुस्लिमों को वह आतंकवादी ही मानती है। कांग्रेस के इस राजनीतिक मर्यादा से गिरे चरित्र से धर्मनिरपेक्षता कमजोर पड़ती है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कांग्रेस का काम राजनीति को प्रदूषित करना और खासकर मुस्लिमो को गुमराह करना रह गया है। आजादी के बाद कांग्रेस ने मुस्लिमो को विभाजन का दोषी ठहराकर और उनका भयादोहन कर वोट हासिल किए। जब मुस्लिमों के सामने सच्चाई आई तो वे कांग्रेस से छिटककर दूर हो गए। कांग्रेस ने तब उनकी बाबरी मस्जिद के ध्वंस में मदद की, मंदिर का शिलान्यास कराया। अब जब कांग्रेस का सत्ता जाने की बेचैनी है तो फिर मुस्लिमो के लिए उसके नेता घड़ियाली आंसू बहाने लगे हैं।जनसत्ता
फोटो -विधान सभा के सामने बेनी का पुतला फूंकते मुस्लिम नौजवान
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Monday, March 18, 2013
कांग्रेस के गले की हड्डी न बन जाएं बेनी बाबू
अंबरीश कुमार
लखनऊ: मार्च । खांटी समाजवादी
का बडबोलापन कांग्रेस के गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है । विधान सभा चुनाव में बेनी बाबू ने इसी तरह की टिपण्णी की और कांग्रेस को लगा कि बेनी के चलते अवध क्षेत्र में कुर्मी एकजुट हो जाएंगे और पार्टी को बहुत फायदा होगा क्योकि टिकट में भी उनकी चली थी । पर नतीजा आया तो कांग्रेस साफ़ थी और बेनी बाबू अपने पुत्र की जमानत तक नहीं बचा पाए थे । अब बेनी ने मुसलमानों को लेकर मुलायम के खिलाफ जो टिपण्णी की है उसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है । मुसलमानों के खिलाफ यही सबसे बड़ा हमला होता है कि वे आतंकवादियों का साथ देते है । आजमगढ़ के संजरपुर को तो आतंकवादियों की नर्सरी तक कहा जा चुका है । इसके बाद आजमगढ़ में कांग्रेस ने नेताओं ने विधान सभा चुनाव में जिस तरह के बयान दिए उससे मुसलमान आहत हुए और कांग्रेस को पूर्वांचल में इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा । अब जब पूर्वांचल में अल्पसंख्यक समुदाय आशंकित है तब बेनी की यह टिपण्णी हिंदू कट्टरपंथी ताकतों को ताकत देने वाली साबित हो रही है ।
बेनी के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि सिर्फ देवबंदी मुसलमान उनकी टिपण्णी से नाराज है और बरेलवी और शिया समुदाय खुश । क्योकि अखिलेश सरकार में इन दोनों की हिस्सेदारी बहुत कम है । पर यह तर्क अल्पसंख्यक समुदाय के गले के नीचे नहीं उतर प़ा रहा । मुसलमानों को आतंकवादियों का शुभचिंतक बताने का प्रचार राष्ट्रीय फलक पर हो रहा है और मुलायम सिंह के बहाने अगर बेनी ने भी वही काम किया है तो उसकी राजनीति को भी समझना होगा । अवध क्षेत्र में मुस्लिम राजनीति पर नजर रखने वाले रिजवान ने कहा -बेनी गोंडा से चुनाव लड़ेंगे और वह मुसलमानों का बरेलवी समुदाय है जिनका देवबंदियों से छतीस का आंकड़ा है इसलिए वे इस टिपण्णी से बेनी के साथ आ गए है । पर यह तर्क समूचे प्रदेश और देश की राजनीति के लिहाज से अलग नजर आ रहा है । आज उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने मुस्लिम नौजवानों ने बेनी का पुतला फूंका तो उसमे सभी शामिल थे । कांग्रेस के एक कार्यकर्त्ता परवेज ने कहा -जब राहुल गाँधी मुसलमानों को कांग्रेस के पक्ष में लेन का प्रयास कर रहे हो और प्रदेश में आतंकवाद के नाम गिरफ्तार निर्दोष नौजवानों को रिहा करने की मांग हो रही हो ऐसे में बेनी की यह टिपण्णी मुसलमानों को आहत करने वाली है और वे तो मुलायम सिंह को और मजबूत कर रहे है । ऐसी ही टिपण्णी से बेनी विधान सभा चुनाव में पार्टी का भठ्ठा बैठा चुके है ।
इस बीच समाजवादी पार्टी ने आज कहा कि कांग्रेस का एक केन्द्रीय मंत्री श्री मुलायम सिंह यादव पर बेहूदा आरोप लगाता है कि आतंकवादियों से उनके रिश्ते हैं। कांग्रेस हाईकमान ने झूठे और अनर्गल बयानबाजी करनेवाले मंत्री से अभी तक इस्तीफा नहीं लिया गया है। यह एक गम्भीर मसला है जिस पर कांग्रेस नेतृत्व की तीन दिनों से चुप्पी जताती है कि मुस्लिमों को वह आतंकवादी ही मानती है। कांग्रेस के इस राजनीतिक मर्यादा से गिरे चरित्र से धर्मनिरपेक्षता कमजोर पड़ती है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कांग्रेस का काम राजनीति को प्रदूषित करना और खासकर मुस्लिमो को गुमराह करना रह गया है। आजादी के बाद कांग्रेस ने मुस्लिमो को विभाजन का दोषी ठहराकर और उनका भयादोहन कर वोट हासिल किए। जब मुस्लिमों के सामने सच्चाई आई तो वे कांग्रेस से छिटककर दूर हो गए। कांग्रेस ने तब उनकी बाबरी मस्जिद के ध्वंस में मदद की, मंदिर का शिलान्यास कराया। अब जब कांग्रेस का सत्ता जाने की बेचैनी है तो फिर मुस्लिमो के लिए उसके नेता घड़ियाली आंसू बहाने लगे हैं।जनसत्ता
फोटो -विधान सभा के सामने बेनी का पुतला फूंकते मुस्लिम नौजवान
का बडबोलापन कांग्रेस के गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है । विधान सभा चुनाव में बेनी बाबू ने इसी तरह की टिपण्णी की और कांग्रेस को लगा कि बेनी के चलते अवध क्षेत्र में कुर्मी एकजुट हो जाएंगे और पार्टी को बहुत फायदा होगा क्योकि टिकट में भी उनकी चली थी । पर नतीजा आया तो कांग्रेस साफ़ थी और बेनी बाबू अपने पुत्र की जमानत तक नहीं बचा पाए थे । अब बेनी ने मुसलमानों को लेकर मुलायम के खिलाफ जो टिपण्णी की है उसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है । मुसलमानों के खिलाफ यही सबसे बड़ा हमला होता है कि वे आतंकवादियों का साथ देते है । आजमगढ़ के संजरपुर को तो आतंकवादियों की नर्सरी तक कहा जा चुका है । इसके बाद आजमगढ़ में कांग्रेस ने नेताओं ने विधान सभा चुनाव में जिस तरह के बयान दिए उससे मुसलमान आहत हुए और कांग्रेस को पूर्वांचल में इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा । अब जब पूर्वांचल में अल्पसंख्यक समुदाय आशंकित है तब बेनी की यह टिपण्णी हिंदू कट्टरपंथी ताकतों को ताकत देने वाली साबित हो रही है ।
बेनी के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि सिर्फ देवबंदी मुसलमान उनकी टिपण्णी से नाराज है और बरेलवी और शिया समुदाय खुश । क्योकि अखिलेश सरकार में इन दोनों की हिस्सेदारी बहुत कम है । पर यह तर्क अल्पसंख्यक समुदाय के गले के नीचे नहीं उतर प़ा रहा । मुसलमानों को आतंकवादियों का शुभचिंतक बताने का प्रचार राष्ट्रीय फलक पर हो रहा है और मुलायम सिंह के बहाने अगर बेनी ने भी वही काम किया है तो उसकी राजनीति को भी समझना होगा । अवध क्षेत्र में मुस्लिम राजनीति पर नजर रखने वाले रिजवान ने कहा -बेनी गोंडा से चुनाव लड़ेंगे और वह मुसलमानों का बरेलवी समुदाय है जिनका देवबंदियों से छतीस का आंकड़ा है इसलिए वे इस टिपण्णी से बेनी के साथ आ गए है । पर यह तर्क समूचे प्रदेश और देश की राजनीति के लिहाज से अलग नजर आ रहा है । आज उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने मुस्लिम नौजवानों ने बेनी का पुतला फूंका तो उसमे सभी शामिल थे । कांग्रेस के एक कार्यकर्त्ता परवेज ने कहा -जब राहुल गाँधी मुसलमानों को कांग्रेस के पक्ष में लेन का प्रयास कर रहे हो और प्रदेश में आतंकवाद के नाम गिरफ्तार निर्दोष नौजवानों को रिहा करने की मांग हो रही हो ऐसे में बेनी की यह टिपण्णी मुसलमानों को आहत करने वाली है और वे तो मुलायम सिंह को और मजबूत कर रहे है । ऐसी ही टिपण्णी से बेनी विधान सभा चुनाव में पार्टी का भठ्ठा बैठा चुके है ।
इस बीच समाजवादी पार्टी ने आज कहा कि कांग्रेस का एक केन्द्रीय मंत्री श्री मुलायम सिंह यादव पर बेहूदा आरोप लगाता है कि आतंकवादियों से उनके रिश्ते हैं। कांग्रेस हाईकमान ने झूठे और अनर्गल बयानबाजी करनेवाले मंत्री से अभी तक इस्तीफा नहीं लिया गया है। यह एक गम्भीर मसला है जिस पर कांग्रेस नेतृत्व की तीन दिनों से चुप्पी जताती है कि मुस्लिमों को वह आतंकवादी ही मानती है। कांग्रेस के इस राजनीतिक मर्यादा से गिरे चरित्र से धर्मनिरपेक्षता कमजोर पड़ती है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कांग्रेस का काम राजनीति को प्रदूषित करना और खासकर मुस्लिमो को गुमराह करना रह गया है। आजादी के बाद कांग्रेस ने मुस्लिमो को विभाजन का दोषी ठहराकर और उनका भयादोहन कर वोट हासिल किए। जब मुस्लिमों के सामने सच्चाई आई तो वे कांग्रेस से छिटककर दूर हो गए। कांग्रेस ने तब उनकी बाबरी मस्जिद के ध्वंस में मदद की, मंदिर का शिलान्यास कराया। अब जब कांग्रेस का सत्ता जाने की बेचैनी है तो फिर मुस्लिमो के लिए उसके नेता घड़ियाली आंसू बहाने लगे हैं।जनसत्ता
फोटो -विधान सभा के सामने बेनी का पुतला फूंकते मुस्लिम नौजवान
Friday, March 9, 2012
न जात चली और न धर्म

अंबरीश कुमार
लखनऊ, मार्च । उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में राजनैतिक दलों की न जात की सोशल इंजीनियरिंग चली और न धर्म का सहारा मिला । न तो बेनी प्रसाद वर्मा की सोशल इंजीनियरिंग चली और न पीएल पुनिया का मिशन ८५ तो दूसरी तरफ दलितों के लिए आरक्षित सीटों पर भी मलायम सिंह मायावती पर भारी पड़े । दूसरे मजहबी आधार पर चुनाव लड़ने वालों को भी बड़ा झटका लगा है । कुछ आतंकवादी घटनाओं के बाद आजमगढ़ को एक तबके ने जब आतंकवादियों की नर्सरी कहा तो कई मुस्लिम संगठनों ने मुसलमानों का सवाल उठाकर राजनीति में भी दखल दिया । इनमे एक उलेमा कौंसिल जो सबसे ज्यादा जोर शोर से उठी और दूसरी पीस पार्टी जिसे सपा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया जा रहा था वह ज्यादातर मुस्लिम इलाकों में हाशिए पर आ गई । आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव को ९३६२९ वोट मिले तो राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के रवींद्र नाथ तिवारी को २५७५ और कौमी एकता दल के अमीर को १२२६ वोट मिले और जमानत जब्त हो गई । यह वह आजमगढ़ का नतीजा है जहाँ मुस्लिम वोटों को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी थी । इस बार सबसे ज्यादा ६९ मुस्लिम विधायक जीत कर आए है जिसमे ४३ विधायक समाजवादी पार्टी के है तो १६ बीएसपी और छह कांग्रेस के । मुस्लिम समुदाय में अंसारी बिरादरी की पार्टी के नाम से मशहूर पीस पार्टी के तीन मुस्लिम विधायक जीते । अंदाजा लगा सकते है कि मजहब के नाम पर इन्हें समर्थन नहीं मिला क्योकि इनका दावा तो दो सौ सीटों का था ।
अब बेनी बाबू की सोशल इंजीनियरिंग पर नजर डाल ले जिन्होंने अवध में बहुत बढ़ चढ़ कर दावे किए थे । वैसे तो कांग्रेस के बारे में पहले जब रीता बहुगुणा जोशी को अध्यक्ष बनाया गया तभी इस संवाददाता ने लिखा था कि राहुल गाँधी का मिशन २०१२ को अब २०१७ कर देना चाहिए क्योकि जिसने कभी भी विधायक का चुनाव न जीता हो उसे चार सौ से ज्यादा विधायको वाला प्रदेश सौंपने का अर्थ कांग्रेस उत्तर प्रदेश को लेकर कत्तई गंभीर नहीं है । राजबब्बर से लेकर संजय सिंह जैसे तेजतर्रार नेता हाशिए पर कर दिए गए और नतीजा सामने है । बेनी बाबू के पुत्र राकेश वर्मा दरियाबाद में सिर्फ हरे नहीं बल्कि तीसरे नंबर पर पहुँच गए । दूसरे विधान सभा क्षेत्रों मसलन बलरामपुर .,मनकापुर ,कर्नलगंज ,गोंडा ,कटरा बाजार ,रुदौली ,हैदरगढ़ ,श्रावस्ती आदि में तो कांग्रेस लड़ाई से ही बाहर है । कुर्मी वोट भी समाजवादी पार्टी की तरफ गए । बाराबंकी के ओमप्रकाश ने कहा -अब लोहा मंत्री बेनी बाबू लकड़ी मंत्री लायक भी नहीं बचे है ,देखे कांग्रेस उन्हें कब तक ढोती है ।
अब मायावती और कांग्रेस के मिशन ८५ पर भी नजर डाल ले । मायावती ने कहा है कि दलित उनके साथ है । यह काफी हद तक सही है पर पूरी तरह नहीं । करीब छबीस फीसद वोट के साथ वे प्रदेश में बड़ी ताकत है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता । पर कांशीराम ने जो वोट बैंक बनाया था उसमे वे अगड़ों का उधार का वोट बैंक पिछले चुनाव में ले आई थी जो काफी हद तक वापस हो गया । पर जो दलित वोट बैंक है उसमे गैर जाटव बड़े पैमाने पर अब उनके हाथ से निकल रहा है ।पूर्वांचल में बहुत सी सीटों पर गैर जाटव ने सपा को वोट किया और दलितों के लिए आरक्षित सीट पर समाजवादी पार्टी को बड़ी सफलता मिली है । ऎसी कुल ८५ सीटों में से ४५ सीटों पर सपा का कब्ज़ा हो गया है ।बसपा को सिर्फ १६ सीटें मिली जबकि कांग्रेस और भाजपा को पांच पांच । पिछले विधान सभा चुनाव में बसपा को ६१ सीते मिली थी ।अब वोट पर भी नजर डाल ले ।महाराज गंज सुरक्षित सीट पर सपा को ८४५८१ वोट मिला तो बसपा को ४८४२६ ।ऎसी बहुत सी सीटों पर सपा काफी अंतर से जीती है । किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा -पूर्वांचल में गैर जाटव मतदाताओं ने बसपा के खिलाफ एकजुट होकर सपा को वोट दिया है जिसके चलते पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी का वोट भी घट गया है। जनसत्ता
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