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Monday, October 29, 2012
सुनीलम के नाम एकजुट हुए जन संगठन
अंबरीश कुमार
लखनऊ, 28 अक्टूबर।देश के करीब बीस जन संगठन और किसान संगठन कांग्रेस और भाजपा के साथ कारपोरेट घरानों की मिलीभगत को लेकर मध्य प्रदेश में बड़ा अभियान छेड़ने जा रहे है ।इस अभियान के केंद्र में सुनीलम है जिन्हें इस गठजोड़ का विरोध करने की बड़ी सजा मिल चुकी है । इस अभियान में किसान मंच ,किसान संघर्ष समिति के साथ अखिल भारतीय किसान यूनियन के दोनों धड़े शामिल है तो एनएपीएम ,पीयूसीएल से लेकर इंसाफ तक । किसान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद सिंह के मुताबिक इस आन्दोलन के संचालन के लिए बनाई गई समिति में राजेंद्र सच्चर प्रशांत भूषण ,जया जेतली ,प्रेम सिंह ,किसान नेता युद्धवीर सिंह ,ऋषिपाल अम्बावत ,चितरंजन सिंह ,मंजू मोहन, मधुरेश आदि विभिन्न क्षेत्रो के प्रतिनिधि शामिल है । गाँधीवादी और समाजवादी संगठन भी सुनीलम के पक्ष में खड़े होने का एलान कर चुके है ।जिसमे उत्तर प्रदेश ,बिहार ,मध्य प्रदेश ,महाराष्ट्र ,दिल्ली के समाजवादी कार्यकर्त्ता शामिल है ।
इस अभियान से जुड़े किसान नेताओ और जन संगठनों का आरोप है कि किसानो की जमीन बचाने की लड़ाई में सुनीलम को फंसाया गया है ।मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अडानी पेच पावर प्रोजेक्ट, पेच डाइवरशन प्रोजेक्ट, मैक्सो व एसकेएस प्रोजेक्ट के नाम पर 50 हजार हजारों किसानों की जमीन छीनी जा चुकी है और वहा जो आंदोलन चला उसका नेतृत्व सुनीलम ही कर रहे थे । पिछले दिनों इस मुद्दे को लेकर छिंदवाडा में मेधा पाटकर की बड़ी जन सभा भी हुई थी । उस जनसभा में किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनीलम ने कहा था कि- बिजली परियोजनाओं को लेकर किसानो की जमीन छीनने के मामले में कांग्रेस और भाजपा साथसाथ है । यह कहा गया था कि पर्यावरण विभाग के बिना अनुमति के अडानी पॉवर प्रोजेक्ट व पेच परियोजना में माचागोरा बांध निर्माण कार्य को आगे बढ़ने देने के लिए सरकार जिम्मेदार है।
यही वह मुद्दा था जिसे लेकर सुनीलम को फंसाने की साजिश रची गई । मानवाधिकार कार्यकर्त्ता चितरंजन सिंह के मुताबिक इस मामले में भाजपा ,कांग्रेस के साथ कारपोरेट घराने भी शामिल है जिसके खिलाफ अब बड़ी लड़ाई लड़ी जाएगी । इसमे जन संगठन तो शामिल है ही पर अभी तक कोई राजनैतिक दल खुल कर सामने नहीं आया । समाजवादी पार्टी ने इस मुड़े पर अफ़सोस तो जताया पर अभी तक मुलायम सिंह ने अपना रुख साफ़ नहीं किया जिससे दुविधा की स्थिति बनी हुई है पर आन्दोलन तो शुरू हो चुका है । इस बीच सर्व सेवा संघ के राम धीरज ने कहा है कि इस लड़ाई में वे न सिर्फ पूरी ताकत से जुड़ेंगे बल्कि अन्य जन संगठनों से भी जुड़ने की अपील करेंगे । जानकारी के मुताबिक जल्द ही एक बैठक में ब्योरेवार कार्यक्रम जरी किया जाएगा । इस बीच चितरंजन सिंह ने सुनीलम से जेल में मुलाकर कर कहा कि वे क़ानूनी लड़ाई जीतने के साथ ही नए सिरे से किसानो के हक़ में संघर्ष शुरू करेंगे ।
jansatta
Thursday, October 18, 2012
गोली चलाई पुलिस ने फंसे सुनीलम
एशिया न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल . (एशिया न्यूज़ नेटवर्क )किसान नेता सुनीलम को मुलताई में १९९८ में हुए किसान संघर्ष के सिलसिले में स्थानीय अदालत ने दोषी करार दिया दिया है जिसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में ले लिया गया .आज उन्हें इस मामले में सजा सुनाई जाएगी .यह घटना उस समय हुई थी जब मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे और किसानो पर हुए गोलीकांड में 24 किसान मारे गए थे .गोलीकांड के जवाब में भी हिंसा हुई जिसमे दो पुलिस वालों की जान गई थी .ये किसान सुनीलम के नेतृत्व में मुलताई के परेड ग्राउंड में धरना दे रहे थे .
किसान मंच ने अदालत के फैसलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे चुनौती देने का एलान किया है .किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा -जिस घटना में पुलिस की गोली से पच्चीस किसान मारे जाए और किसी पुलिस वाले को दोषी न माना जाए और एक किसान नेता समेत दो लोगो को फंसा दिया जाए यह इन्साफ तो नहीं है .इस मुद्दे को लेकर देश भर के किसान संगठन एकजुट होकर विरोध करेंगे. गौरतलब है कि सुनीलम छिंदवाडा में अडानी के पावर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे है जिसे कमलनाथ का संरक्षण मिला हुआ है .सुनीलम टीम अन्ना के सदस्य रहे है पर अन्ना से लेकर केजरीवाल तक का कोई बयान इस पर नहीं आया है .
Thursday, April 12, 2012
सुनीलम को फंसाए जाने पर खामोश क्यों है अन्ना हजारे

अंबरीश कुमार
लखनऊ , अप्रैल । अन्ना हजारे और उनकी टीम जो संसद पर निशाना साधती रही है ,प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों पर हमला करती है और सीबीआई को राजनीति का सरकारी औजार बताती रही है वह मौका पड़ने पर किस तरह खामोश हो जाती है यह टीम अन्ना के सदस्य और किसान नेता सुनीलम और ६८ किसानो के खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट दाखिल करने बाद सामने आ गया गया है । किसान मंच ने राजनैतिक वजहों से किसान नेता सुनीलम को फंसाए जाने और अन्ना हजारे की ख़ामोशी की तीखी निंदा की है । सुनीलम मध्य प्रदेश के छिदवाडा में पेंच परियोजना से जुडी कुछ अन्य परियोजनाओं का विरोध कर रहे है जिससे कांग्रेस के दिग्गज नेता और केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से और अडानी समूह से भी टकराव चल रहा है । ऐसे में सीबीआई की भूमिका पर सवाल खड़ा हो रहा है । किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह और मंच के उपाध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के पौत्र अक्षय सिंह ने आज यहाँ कहा -किसान संघर्ष समिति के नेता सुनीलम को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की वजह से यह सब झेलना पड़ रहा है । हैरानी की बात यह है कि हर मुद्दे पर सीधे चैनल पर प्रगट होने वाली टीम अन्ना के किसी भी सदस्य ने अभी तक इसकी निंदा तक नहीं की है । किसान मंच ने साफ़ किया है कि सीबीआई की इस कार्यवाई का वह पुरजोर विरोध करेगी और उनके पक्ष में जन समर्थन भी जुटाएगी । यह पूरा मामला कारपोरेट घरानों की लूट और किसानो के शोषण से जुड़ा हुआ है ।
सुनीलम और ६८ किसानो के खिलाफ जबलपुर की सीबीआई अदालत में आईपीसी की धारा १४७,१४८,१४९,३८०, ४२६ ,४२७,४४७,४३६ के तहत चार्जशीट दायर की गई है । किसान मंच के मुताबिक ११ सितंबर २००७ को मुलताई में हुए किसान संघर्ष में २४ किसान और एक पुलिस वाला मारा गया था । इस आंदोलन का नेत्रित्व करने वाले सुनीलम के साथ दर्जनों किसानो पर हत्या समेत कई मुक़दमे दर्ज किए गए । इस मामले में पुलिस प्रशासन के खिलाफ कोई मामला नहीं चलाया गया । विनोद सिंह ने कहा -यह सब राजनैतिक बदले की भावना के तहत किया जा रहा है । कांग्रेस जो किसानो के नाम पर घडियाली आंसूं बहती है किस तरह मध्य प्रदेश के किसानो से बदला ले रही है इससे यह साफ़ हो गया है ।
अफ़सोस की बात यह है की अन्ना हजारे और उनकी टीम इसपर खामोश है जबकि खुद सुनीलम उनकी टीम का हिस्सा है । मध्य प्रदेश में पहले आन्दोलन में चौबीस किसानो की जान गई और डेढ़ सौ किसानो को गोली लगी । अब करीब सत्तर किसान फर्जी मामला बनाकर फंसाए जा रहे है । इसके पीछे वे कारपोरेट घराने शामिल है जो जल जंगल जमीन पर कब्ज़ा करने के लिए हर हथकंडे अपना रहे है । जिस तरह अडानी समूह किसानो की जमीन छीन रहा है वह शर्मनाक है और उसके खिलाफ किसानो को लामबंद करने वाले सुनीलम को फंसाया जा रहा है । इसे लेकर किसान मंच विभिन्न जन संगठनों को लामबंद करेगा ।
Friday, March 23, 2012
खेती की जमीन बचाने के लिए सड़क पर उतरेंगे किसान
अंबरीश कुमार
लखनऊ, मार्च। उत्तर भारत के कई राज्यों में अब किसानो की खेती की जमीन छीने जाने के खिलाफ बड़ा किसान आंदोलन उभरने जा रहा है । इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसान मंच के साथ ,किसान संघर्ष समिति और जनआंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय देश के विभिन्न किसान संगठनों को लामबंद करने का प्रयास करेगा । दिल्ली से लखनऊ पहुंचे किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने अप्रैल से शुरू होने वाले इस किसान आंदोलन की जानकारी दी । इस आंदोलन की अगली कतार में मेधा पाटकर ,सुनीलम ,स्वामी अग्निवेश ,चितरंजन सिंह और विनोद सिंह आदि होंगे ।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अडानी पेच पावर प्रोजेक्ट, पेच डाइवरशन प्रोजेक्ट, मैक्सो व एस के एस प्रोजेक्ट के नाम पर 50 हजार किसानों की जमीनों का जोर जबरदस्ती से छीनी जा चुकी है और वहा इसे लेकर आंदोलन चल रहा है । अब यह आंदोलन और व्यापक होने जा रहा है और इसमे अदानी समूह की सभी परियोजनाओं के खिलाफ किसानो को खड़ा किया जाएगा । दिल्ली में इस सिलसिले में हुई जन संसद में भी कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए है । किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने आज यहाँ जनसत्ता से कहा -दिल्ली की सरकार को भी किसानो की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही है इसलिए अब किसान जमीन पर ही संघर्ष तेज करने जा रहा है । संसद के बाद विभिन्न राज्यों में जहाँ अडानी की परियोजनाए चल रही है वहा आंदोलन छेड़ा जाएगा । इसके लिए संसद पर प्रदर्शन के बाद पूरी रणनीति बने जाएगी । फ़िलहाल कई किसान संगठनों ने इस आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई है । इस वजह से सभी किसान संगठनों की बैठक बुलाकर इस आंदोलन की रूप रेखा बने जाएगी ।
गौरतलब है कि इस मुद्दे को लेकर छिंदवाडा में मेधा पाटकर ,विनोद सिंह और चितरंजन सिंह बड़ी जन सभा कर चुके है । मेधा पाटकरका आरोप है कि केंद्र के दो-दो मंत्रियों ने हमें भरोसा दिया था कि पर्यावरण के अनुमति न मिलने के कारण अडानी परियोजना का कोई निर्माण कार्य नहीं होगा पर यह भरोसा झांसा साबित हुआ ।
पर अब इसका प्रतिकार और तेज होगा और उनसभी जगहों पर होगा जहा अडानी की परियोजना में काम हो रहा हो । विनोद सिंह ने आगे कहा - जिस तरह नोएडा व दादरी में हमने लड़कर किसानों की जमीन बचाई है उसी तरह किसान मंच छिंदवाड़ा के किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलकर संघर्ष करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि हमारे साथ पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के प्रपोत्र अक्षय सिंह व राजनारायण के भांजे और किसानो का सावाल उठाने वाले बृजेश राय भी इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे । दूसरी तरफ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनीलम ने कहा- बिजली परियोजनाओं को लेकर किसानो की जमीन छीनने के मामले में कांग्रेस और भाजपा साथसाथ है । केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को अपनी जमीन से बेदखल करने पर अमादा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण विभाग के बिना अनुमति के अडानी पॉवर प्रोजेक्ट व पेच परियोजना में माचागोरा बांध निर्माण कार्य को आगे बढ़ने देने के लिए सरकार जिम्मेदार है।
लखनऊ, मार्च। उत्तर भारत के कई राज्यों में अब किसानो की खेती की जमीन छीने जाने के खिलाफ बड़ा किसान आंदोलन उभरने जा रहा है । इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसान मंच के साथ ,किसान संघर्ष समिति और जनआंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय देश के विभिन्न किसान संगठनों को लामबंद करने का प्रयास करेगा । दिल्ली से लखनऊ पहुंचे किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने अप्रैल से शुरू होने वाले इस किसान आंदोलन की जानकारी दी । इस आंदोलन की अगली कतार में मेधा पाटकर ,सुनीलम ,स्वामी अग्निवेश ,चितरंजन सिंह और विनोद सिंह आदि होंगे ।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अडानी पेच पावर प्रोजेक्ट, पेच डाइवरशन प्रोजेक्ट, मैक्सो व एस के एस प्रोजेक्ट के नाम पर 50 हजार किसानों की जमीनों का जोर जबरदस्ती से छीनी जा चुकी है और वहा इसे लेकर आंदोलन चल रहा है । अब यह आंदोलन और व्यापक होने जा रहा है और इसमे अदानी समूह की सभी परियोजनाओं के खिलाफ किसानो को खड़ा किया जाएगा । दिल्ली में इस सिलसिले में हुई जन संसद में भी कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए है । किसान मंच के अध्यक्ष विनोद सिंह ने आज यहाँ जनसत्ता से कहा -दिल्ली की सरकार को भी किसानो की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही है इसलिए अब किसान जमीन पर ही संघर्ष तेज करने जा रहा है । संसद के बाद विभिन्न राज्यों में जहाँ अडानी की परियोजनाए चल रही है वहा आंदोलन छेड़ा जाएगा । इसके लिए संसद पर प्रदर्शन के बाद पूरी रणनीति बने जाएगी । फ़िलहाल कई किसान संगठनों ने इस आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई है । इस वजह से सभी किसान संगठनों की बैठक बुलाकर इस आंदोलन की रूप रेखा बने जाएगी ।
गौरतलब है कि इस मुद्दे को लेकर छिंदवाडा में मेधा पाटकर ,विनोद सिंह और चितरंजन सिंह बड़ी जन सभा कर चुके है । मेधा पाटकरका आरोप है कि केंद्र के दो-दो मंत्रियों ने हमें भरोसा दिया था कि पर्यावरण के अनुमति न मिलने के कारण अडानी परियोजना का कोई निर्माण कार्य नहीं होगा पर यह भरोसा झांसा साबित हुआ ।
पर अब इसका प्रतिकार और तेज होगा और उनसभी जगहों पर होगा जहा अडानी की परियोजना में काम हो रहा हो । विनोद सिंह ने आगे कहा - जिस तरह नोएडा व दादरी में हमने लड़कर किसानों की जमीन बचाई है उसी तरह किसान मंच छिंदवाड़ा के किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलकर संघर्ष करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि हमारे साथ पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के प्रपोत्र अक्षय सिंह व राजनारायण के भांजे और किसानो का सावाल उठाने वाले बृजेश राय भी इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे । दूसरी तरफ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनीलम ने कहा- बिजली परियोजनाओं को लेकर किसानो की जमीन छीनने के मामले में कांग्रेस और भाजपा साथसाथ है । केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को अपनी जमीन से बेदखल करने पर अमादा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण विभाग के बिना अनुमति के अडानी पॉवर प्रोजेक्ट व पेच परियोजना में माचागोरा बांध निर्माण कार्य को आगे बढ़ने देने के लिए सरकार जिम्मेदार है।
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