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Monday, August 20, 2012

अगला चुनाव राहुल और मोदी में-बेनी

लखनऊ, अगस्त ।इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने सोनिया गाँधी बौर राहुल गांधी को फिर सांसत में डाल दिया है । रविवार और सोमवार को बाराबंकी में उन्होंने पहले महंगाई ,कांग्रेस ,मोदी और मुलायम पर तीखी टिपण्णी की और फिर सफाई भी दी लेकिन तब तक कांग्रेस की वे फजीहत करा चुके थे । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से लेकर भाजपा तक ने बेनी प्रसाद वर्मा की खिंचाई करते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करने की मांग की ।समाजवादी पार्टी ने तो साफ़ कहा कि बेनी विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की लुटिया डुबो चुके है और अब वे लोकसभा चुनाव में कसर पूरी करना चाहते हैं ।हालाँकि आज बेनी ने कांग्रेसियों की भी उसी अंदाज में खिंचाई की जैसे की विपक्ष की कर रहे हो ।बेनी ने कहा-कांग्रेस में मुझे राहुल गाँधी और सोनियां लाई हैं बाकि छुटभैये बरसात के मेढक की तरह जो चाहे बोले कोई फर्क नही पड़ता । महंगाई का स्वागत करने वाली टिपण्णी पर सफाई दी और कहा मीडिया ने गलत अर्थ निकाला उन्होंने तो किसानो के फायदे की बात कही थी । केन्द्र मे तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की मुलायम सिंह यादव की टिपण्णी पर बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव का सपना कभी पूरा नही होने वाला है। बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव सठिया गए है ।बेनी ने यह भी कहा कि अगला चुनाव राहुल बनाम मोदी का है ,बीच वाले सब हाशिए पर चले जाएंगे।भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा -मुलायम सिंह यादव देश के वरिष्ठ नेता है और उन्होंने कांग्रेस को समर्थन दे रखा है ऐसे कोई काबीना मंत्री उनपर कीचड उछाले तो कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठेगा ही जो जिस नेता का समर्थन लेती है उसी के खिलाफ माहौल बनवा रही । फिर महंगाई की टिपण्णी तो कांग्रेस की नीति उजागर करने वाली है जिससे बिचौलियों को फायदा हो रहा है यदि कांग्रेस बेनी के विचारों से असहमत है तो उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करे ।गौरतलब है कि विधान सभा चुनाव में बेनी के बड़बोलेपन से जो माहौल बिगड़ा उससे उनके गढ़ में ही कांग्रेस साफ़ हो गई ।तब लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा था -कुछ दिन में लोहा मंत्री लकडी मंत्री में बदल जाएंगे पर कांग्रेस ने उन्हें पिछडों खासकर कुर्मी बिरादरी का कद्दावर नेता मानते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में बरक़रार रखा ।यह बात अलग है कि उनकी हार कुर्मियों के गढ़ में ही हुई । समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री राजेन्द्र चैधरी ने कहा है कि बढ़ती मंहगाई पर खुशी जाहिर कर और मुलायम सिंह यादव पर अभद्र टिप्पणी कर केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने अपने मानसिक दिवालिएपन का सार्वजनिक प्रदर्शन कर दिया है। जन सामान्य के प्रति इस बयान से उनकी संवेदन शून्यता का परिचय होता है। उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों में इनके इसी तरह के अनाप-शनाप बयानों के चलते हुआ था। कांग्रेस के बड़बोले मंत्रियों ने ही कांग्रेस की लुटिया डुबोई थी और अब भी वे कोई सबक लेने को तैयार नहीं दिखते है। मंहगाई से किसानों को फायदे की बात कोई सिरफिरा ही कह सकता है। केन्द्र सरकार ने डीजल-पेट्रोल रसोई गैस के साथ खाद के दाम बढ़ाकर खेती को बड़ी हद तक अलाभप्रद बना दिया है। किसान उपभोक्ता भी है। बदहाली में सैकड़ों किसान आत्महत्या को मजबूर हुए हैं। आम आदमी की के लिए तो दाल, सब्जी और फल आदि दूसरे पोषक पदार्थ गायब होते जा रहे हैं। घर-गृहस्थी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। इसके लिए यूपीए सरकार की आर्थिक नीतियां ही जिम्मेदार हैं। पूरे देश में जब जनता में मंहगाई भ्रष्टाचार को लेकर आक्रोश व्याप्त है तब एक केन्द्रीय मंत्री के जिम्मेदार पद पर बैठा कोई व्यक्ति ऐसी अनर्गल बात करे तो इस पर शर्मिंदा होने के अलावा क्या हो सकता है? जनता त्रस्त है, बेनी बाबू इसी में परपीड़ा सुख से मस्त हैं। उन्होने इतनी अवैध कमाई कर ली है कि उन्हें मंहगाई का एहसास ही नहीं हो रहा है। जहां तक मुलायम सिंह यादव के बारे में बेनी प्रसाद की अभद्र टिप्पणियेां का सवाल है उसे चांद पर थूकने जैसा दुस्साहस ही करार दिया जा सकता है। आज बेनी प्रसाद वर्मा जो कुछ हैं वह श्री मुलायम सिंह यादव की बदौलत ही है। जिले से उठाकर प्रदेश की राजनीति में उन्हें उन्होने ही स्थापित किया था। श्री मुलायम सिंह यादव के कंधे पर बैठकर उन्होने अपना राजनीतिक कद बढ़ाया पर कृतज्ञता दिखाने के बजाए वे कृतधन हो गए है। श्री यादव के बारे में कुछ बोलने से पहले बेनी प्रसाद वर्मा को यह भी तो सोचना चाहिए था कि वे उनके मुकाबले कहां ठहरते हैं ।उन्होंने आगे कहा - समाजवादी पार्टी यूपीए-2 सरकार को अपना बिना शर्त समर्थन दे रही है ताकि सांपद्रायिक तत्वों की केन्द्र में दाल न गलने पाए। लेकिन बेनी प्रसाद जैसे मंत्री मुलायम सिंह यादव के विरूद्ध बोलकर, जो धर्मनिरपेक्षता के इस देश में प्रतीक पुरूष बन गए हैं, सांप्रदायिक और जातीय तत्वों को ही बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। शायद इसके पीछे उनका पुराना आरएसएस स्वयं सेवक का संस्कार फिर उमड़ आया हो तो ताज्जुब नहीं। वे पहले भी आरएसएस शाखाओं में जाते रहते थे। बेनी प्रसाद वर्मा का यह आचरण राजनीतिक शिष्टाचार और मर्यादा के विपरीत है। इसकी जितनी निन्दा की जाए कम है। अंबरीश कुमार